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ड्रग्स के पैसों से हथियार खरीदते हैं आतंकी: मोदी

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मन की बात शुरु करते हुए पीएम मोदी ने कहा, मुझे युवा पीढ़ी की चिंता हो रही है, क्योंकि किसी मां का लाल या बेटी नशे के दलदल में फंसते जा रहे हैं। इससे पूरा परिवार ही नहीं देश तबाह हो रहा है। नशा एक ऐसी बीमारी है जो अच्छे-अच्छों को बर्बाद कर देता है।
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मोदी ने कहा कि नशे की लत के शिकार युवकों को मैं बताना चाहता हूं कि जिन पैसों से आप ड्रग्स ख्ररीदते हैं। उन पैसों से ड्रग माफिया आतंकवादियों के लिए हथियार खरीदते हैं और उन हथियारों से निकली गोली भारत मां के सैनिक के सीने को छलनी करती है। हमे सोचना चाहिए कि कहीं हम आतंकवादियों की मदद तो नहीं कर रहे हैं?

पीएम मोदी ने कहा कि," जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था तो जिन अफसरों को बहादुर समझता था उन्हें अपने बच्चों की नशे की लत के कारण रोते देखा है। नशा एक जंजाल है जिसे दूर करने की जरुरत है। स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक विचार को अपना लो, उसके सपने देखो, शरीर के हर हिस्से को उसमें उतार दो, उसमें रम जाओ, इसलिए एक ध्येय बनाओ।
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मोदी ने कहा कि नशे की लत को युवाओं से दूर करने के लिए सबसे बड़ा योगदान उनके पैरेंट्स ही दे सकते हैं। इसलिए पैरेंट्स को अपने बच्चों को पर्याप्त समय देना चाहिए। आजकल समय के अभाव के चलते मां-पिता अपने बच्चों को समय नहीं दे पा रहे है, नतीजन बच्चे मां-पिता की कमी को दूर करने के लिए नशे की ओर चले जाते हैं।
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कश्मीर की टीम को दी बधाई

उन्होंने कहा, पैरेंट्स को बच्चे के साथ पांच वर्ष की आयु तक दुलार, दस वर्ष तक अनुशासन और सोलह साल के बाद मित्र जैसा व्यवहार करना चाहिए।

मन की बात में मोदी ने आगे कहा कि पुलिस विभाग के साथ मेरी एक टोल फ्री नम्बर शुरु करने को लेकर मीटिंग हुई है, जो नशाखोरी की रोकथान के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा, कई माता-पिता शर्म और अपने बच्चे के भविष्य की चिंता के चलते पुलिस के पास शिकायत नहीं कर पाते हैं। हालांकि अभी मामला विचारधीन है।

पीएम मोदी ने मुम्बई में हुए कश्मीर और मुम्बई के बीच रणजी फाइनल मैच में कश्मीरी टीम को जीत की बधाई दी। उन्होंने कहा कि भीषण जल आपदा के बाद कश्मीरवासी कठिनाईयों से जूझ रहा है, उसके बावजूद यह जीत वाकई एक आदर्श उदाहरण है।

आखिर में अपनी बातों को समाप्त करते हुए उन्होंने यूएन बैठक में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को मंजूरी मिलने पर हर्ष जताते हुए इसे देश के लिए गर्व की बताया। उल्लेखनीय है कि भारत की ओर से यह प्रस्ताव यूएन को भेजा गया गया था, इस प्रस्ताव पर 177 देशों ने समर्थन किया था।
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