राजनीतिक कारणों से राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक (चोगम) में शिरकत न कर पाने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे को पत्र लिखकर अफसोस जाहिर किया है।
पत्र में राजनीतिक कारणों का उल्लेख करने से बचते हुए प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच अरसे से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का जिक्र किया है।
रविवार को लिखा गया यह पत्र अब कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग के जरिए राजपक्षे को सौंपा जाएगा। तमिलनाडु की क्षेत्रीय पार्टियों के साथ-साथ चार केंद्रीय मंत्रियों के विरोध के बाद कांग्रेस कोरग्रुप ने प्रधानमंत्री को इस बैठक से दूर रखने का फैसला किया।
हालांकि प्रधानमंत्री कूटनीतिक संबंध न बिगड़ने देने का हवाला देते हुए चोगम में शिरकत करने के पक्ष में थे। जबकि विरोध करने वाले मंत्रियों की दलील थी कि श्रीलंका में तमिलों के नरसंहार के बाद चोगम में प्रधानमंत्री का शामिल होना सियासी घाटे का कारण बन सकता है।
पीएमओ के सूत्रों के मुताबिक पत्र में प्रधानमंत्री ने चोगम में शिरकत न करने के राजनीतिक कारणों का जिक्र नहीं किया है। पत्र में दोनों देशों के बीच अरसे से चले आ रहे मजबूत द्विपक्षीय और कूटनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए भविष्य में इसके और मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है।
15 और 16 नवंबर को होने वाली बैठक में देश का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद करेंगे। विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री के चोगम में शिरकत न करने के फैसले का बचाव किया।
मंत्रालय की दलील है कि अब तक हुई चोगम की नौ बैठकों में प्रधानमंत्री ने पांच में शिरकत की है। बाकी की चार बैठकों का प्रतिनिधित्व मंत्री ही करते आए हैं।