पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की फांसी की सजा उम्र कैद में बदले जाने और इसके बाद तमिलनाडु सरकार की इन्हें तीन दिनों के अंदर रिहा करने की घोषणा ने देश में राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व पीएम के कातिलों को रिहा करने के जयललिता के फैसले पर नाराजगी जताने के बाद गुरुवार को सरकार और पार्टी दोनों ही अचानक हरकत में आ गई।
मनमोहन भी हुए नाराज
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजीव के हत्यारों की रिहाई के फैसले की तीखी निंदा करते हुए इसे न्याय के सभी सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
प्रधानमंत्री ने बयान जारी कर राजीव गांधी की हत्या को देश की आत्मा पर हमला करार देते हुए जयललिता को आतंकवाद के नाम पर राजनीति न करने की नसीहत दी। उन्होंने राज्य सरकार के रिहाई के फैसले को न्याय के सभी सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया।
भाजपा ने भी की आलोचना
मनमोहन सिंह ने कहा कि रिहाई करने की योजना कानूनी रूप से तर्कसंगत नहीं है। भाजपा ने भी तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस के सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में इस मामले को उठाया।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद संजय निरूपम ने इस मामले को उठाते हुए जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुली असहमति जताई, वहीं जयललिता पर तीखा हमला बोला।
सदन में भिड़े सांसद
निरूपम ने कहा कि तमिलनाडु सरकार का यह फैसला वोट के लिए किसी भी सीमा तक जाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। इसके बाद सदन में कांग्रेस और डीएमके सदस्यों में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
दोनों दलों के सांसद वेल में आ कर हंगामा मचाने लगे। इस कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
मुद्दा बनाने को शुरू किया अभियान
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई और फांसी की सजा उम्र कैद में बदले जाने के मामले को कांग्रेस भावनात्मक मुद्दा बनाने में जुट गई है। पार्टी ने ‘जस्टिस फॉर राजीव’ के नाम से ट्विटर पर अभियान भी शुरू कर दिया है।
फैसले पर राहुल की नाराजगी जताने के तत्काल बाद पार्टी के मीडिया सेल के प्रभारी अजय माकन ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें राजीव राहुल को सीने से चिपकाए हुए हैं। जस्टिस फॉर राजीव के हैशटेग के साथ इस तस्वीर का कैप्शन है बेहद भावनात्मक तस्वीर।