राजनीतिक गलियारों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आमतौर पर चुप रहने वाला इंसान माना जाता है लेकिन सोमवार को उनका दूसरा रूप देखने को मिला।
अपने आवास पर मिलने आए परिवीक्षाधीन आईएएस के साथ मुलाकात में उन्होंने दिल खोलकर बातें की। उन्होंने युवा सिविल सेवकों को बताया कि कैसे वे देश के लोगों के आंसू पोंछने के लिए सार्वजनिक जीवन में आएं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि वे बहुत ही विनम्र परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म वर्तमान में पाकिस्तान के एक गरीब सुदूर गांव में हुआ था। उन्होंने कहा कि 12 साल की उम्र तक उन्होंने डॉक्टर को नहीं देखा था। गांव में न सड़कें थी और न ही स्वच्छ पानी। पहली बार मुझे महसूस हुआ कि जमीनी हालात क्या हैं। इसने हमेशा मुझे आगे बढ़ने और अच्छा करने की प्रेरणा दी।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने युवा सिविल अधिकारियों को बताया कि कैसे उन्होंने अपनी शिक्षा हासिल की, सरकार और संयुक्त राष्ट्र में विभिन्न अहम पदों पर काम किया। इसके बाद वह भारत सरकार में वित्त मंत्री और अब प्रधानमंत्री बनें।
योजना आयोग में उपाध्यक्ष और यूजीसी के चेयरमैन भी रहे प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी महत्वाकांक्षा गरीबी को खत्म करने की दिशा में काम करने की रही है।
उन्होंने महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों महान नेताओं का कहना था कि अनैतिकता गरीबी की सबसे बड़ी वजह है और देश के हर नागरिक की आंख के आंसू पोंछने की जरूरत है। इन कथनों ने मुझे सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बनने को प्रेरित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक अकेला व्यक्ति केवल कुछ चीजें ही कर सकता है लेकिन लोक प्रशासन का हिस्सा बनकर लोगों के कल्याण के कई कार्य कर सकते हैं, जिससे लोगों को महसूस हो कि देश में उनकी चिंता करने वाली सरकार है जोकि उनके खासकर सुविधाओं से महरूम जनता का ख्याल रखती है।