प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष के निशाने पर तो हैं ही उनके अपने मंत्री भी लगातार उनकी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
प्रधानमंत्री एक एक समस्या से निपट नहीं पाते कि अपनों की वजह से वे दूसरी मुश्किल से घिर जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने भरोसा कर जिन लोगों को तरक्की दी, उन्होंने उनकी दुश्वारियां कम करने के बजाय बढ़ाने का ही काम किया।
खास बात ये है कि ये मंत्री राजनीति में आने से पहले पेशेवर वकील रहे हैं। सरकार में शामिल होने से पहले वे पार्टी और सरकार को बेहतर तरीके से डिफेंड करते आए थे और इसी के ईनाम के तौर पर उन्हें मंत्री पद से नवाजा गया था।
पवन कुमार बंसलः
चंडीगढ़ से सांसद पवन कुमार बंसल को प्रमोट कर रेल मंत्री के तौर पर एक बड़ी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दी। रेल मंत्री के तौर पर उन्होंने भरोसा दिया था कि वे रेलवे का इन्फ्रास्ट्रक्टर दुरुस्त करेंगे, यात्री सुविधाएं बढ़ाएंगे और रेलवे में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करेंगे।
रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार तो खत्म नहीं हुआ लेकिन खुद पर भ्रष्टाचार की आंच जरूर गई। सीबीआई ने उनके भांजे विजय सिंगाल को घूस के 90 लाख कैश के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
इस घटनाक्रम ने पहले से बैकफुट पर पहुंची सरकार को और अधिक मुश्किल में डाल दिया है। पवन कुमार बंसल ने भी वही बात कही जो एक वकील कोर्ट में कहता है कि आरोप लगने से दोष साबित नहीं हो जाता।
भले ही जांच से पहले कांग्रेस पार्टी ने बंसल को क्लीन चिट दे दी हो और बंसल ने अपने भांजे से कारोबारी रिश्ता ना होने की बात कही हो लेकिन ये सवाल तो बनता ही है कि रेलवे में प्रमोशन के लिए विजय सिंगाल ने किस के इशारे पर घूस ली।
विपक्ष ने इस मसले पर रेल मंत्री को बर्खास्त करने तक की मांग कर दी है। अश्वनी कुमार और सीबीआई के मसले पर संसद पहले से ही ठप थी अब इस मसले ने विपक्ष को एक और हथियार थमा दिया है।
अश्वनी कुमारः
पवन बंसल से पहले कानून मंत्री अश्वनी कुमार प्रधानमंत्री की मुश्किलें बढ़ा चुके हैं। सीबीआई के मसले पर अश्वनी कुमार ने तो पूरी सरकार को अदालत के कठघरे में ला दिया है।
पवन बंसल के लिए तो पार्टी पूरा साथ दे रही है लेकिन अश्वनी कुमार से उसने पूरी तरह किनारा कर लिया है। अश्वनी कुमार की गलती से सरकार और पार्टी को चौतरफा नुकसान हो रहा है। एक तो अदालत की फटकार सुननी पड़ रही है दूसरी तरफ सदन के अंदर और बाहर विपक्ष ने सरकार और संगठन को पूरी तरह घेर लिया है।