इसे ड्रैगन की चुनौती का असर कहें या बिजनेस में बढ़ते कदम का प्रभाव, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देश में निवेश को लेकर जितने जतन कर रहे हैं, उससे ज्यादा देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
इसकी झलक बृहस्पतिवार को देखने को मिली जब थाईलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलुक शिनवात्रा के साथ बातचीत में उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नेवी की कोआर्डिनेटेड पेट्रोलिंग पर जोर देकर इसे संयुक्त बयान में भी जगह दिला दी।
इससे पहले जापान में भी अपने समकक्ष शिंजो अबे से बातचीत में प्रधानमंत्री ने यूएस-2 एयरक्राफ्ट हासिल करने के लिए ज्वाइंट वर्किं ग ग्रुप बनाने और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच नियमित अभ्यास पर सहमति बनवा ली थी।
दरअसल बिजनेस की नब्ज जानने वाले मनमोहन सिंह समझ गए हैं कि जापान और थाईलैंड के निवेशक भारत के दक्षिण और पश्चिम हिस्से में इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तक लगाने में रुचि ले रहे हैं।
तभी उन्होंने यहां प्रधानमंत्री शिनवात्रा के भोज में दिए भाषण और फिर मीडिया को जारी बयान में थाईलैंड और भारत के बीच बंदरगाह से बंदरगाह तक की लिंक की बात की।
उन्होंने दिल्ली-मुंबई इंडिस्ट्रयल कॉरिडोर और चेन्नई-बंगलूरू कॉरिडोर के फायदे गिनाते हुए यहां निवेश के लिए न्योता दिया। फिर उन्होंने थाई उद्योगपतियों के सामने सबसे बड़ा पासा फेंका और कहा आप आएं, हम आपके लिए फास्ट ट्रैक बिजनेस वीजा सर्विस की शुरुआत कर चुके हैं।
थाईलैंड भी भारतीय उद्यमियों को ऐसी ही सुविधा देने पर राजी हो गया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह जाते ही अपने रक्षा और वित्त मंत्री को थाईलैंड भेजेंगे जिससे उद्योग और समुद्री सुरक्षा की दिशा में हम आगे बढ़ सकेंगे।
थाई नरेश के लिए बोधिवृक्ष का पौधा भेंट किया
डॉ. मनमोहन सिंह बैंकाक पहुंचते ही सबसे पहले थाई नरेश के लिए बोध गया से खासतौर पर लाया गया बोधि वृक्ष का नन्हा पौधा प्रधानमंत्री यिंगलुक शिनवात्रा को भेंट दिया।
यह बोध गया स्थित मूल वृक्ष से तैयार किया गया है और खास तौर से प्रधानमंत्री ने इसे थाई नरेश को देने के लिए मंगवाया था। लेकिन, थाई नरेश भूमिबोल अदुल्यदेज के बीमार होने की वजह से बोधि वृक्ष का पौधा वहां की प्रधानमंत्री ने स्वीकार करते हुए मनमोहन सिंह को धन्यवाद दिया।