यूपीए सरकार के नौ साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हवाई यात्रा पर अब तक 642 करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च हो चुके हैं।
आरटीआई एक्ट के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह जानकारी दी है।
इसके मुताबिक 2004 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मनमोहन सिंह ने कुल 67 दौरे किए, जिनमें से पांच के बिल नहीं मिले हैं। बाकी 62 हवाई यात्राओं पर कुल 642.45 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
पिछले साल आरटीआई के तहत खुलासा हुआ था कि पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के पांच साल के कार्यकाल के दौरान विदेशी दौरों पर 223 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद से ही वीआईपी दौरों को लेकर बहस शुरू हो गई थी।
पीएम की यात्रा संबंधी सूची के मुताबिक सबसे ज्यादा खर्च 2012 में जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए मैक्सिको और रियो प्लस 20 शिखर सम्मेलन के लिए ब्राजील यात्रा पर हुआ। उनके इस सात दिवसीय दौरे पर 26.94 करोड़ रुपये खर्च हुए।
इसके बाद 2010 में उनकी वॉशिंगटन और ब्राजील यात्रा पर हुए 22.70 करोड़ रुपये के खर्च का नंबर आता है। इस दौरान वह परमाणु सुरक्षा सम्मेलन, ब्रिक सम्मेलन और आईबीएसए सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमेरिका के वाशिंगटन डीसी और ब्राजील गए थे।
केंद्रीय सूचना आयोग ने हाल ही में एक आदेश में कैबिनेट सचिवालय से जनहित के मद्देनजर मंत्रियों और वीवीआईपी की यात्रा पर हुए खर्च का ब्यौरा सार्वजनिक करने के लिए कहा था।
मुख्य सूचना आयुक्तसत्यानंद मिश्रा ने कहा था, ‘हमने देखा है कि राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसी हस्तियों की यात्रा को लेकर लोगों की गहरी दिलचस्पी रहती है। आरटीआई आवेदनों के जरिये अक्सर इन दौरों के बारे में जानकारी मांगी जाती है।’