प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सतत विकास शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर साफ कर दिया कि जब तक हम चुनिंदा लोगों की जगह समावेशी विकास का रास्ता नहीं निकालते सतत विकास का लक्ष्य मृगतृष्णा ही बना रहेगा।
पीएम के अनुसार पर्यावरण और विकास से संबंधित मुद्दे एक-दूसरे से सीधे तौर पर जुड़े हैं। 40 वर्षों में हमने बेशक साफ-सुथरे पर्यावरण के लिए वचनबद्धता दिखाई है लेकिन हमारी चुनौती सभी के लिए विकास सुनिश्चित करना है।
विकसित देशों को आगाह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन देशों ने अगर क्योटो व अन्य समझौतों की दिशा में काम नहीं किया तो भारत समेत दूसरे विकासशील देशों को इस संबंध में मनाना मुश्किल होगा। सतत विकास की दिशा में जलवायु परिवर्तन मुख्य चुनौती बना है। इसका हल समन्वित वैश्विक प्रयास से निकाला जा सकता है।
भारत की जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विकास की रणनीति का अहम हिस्सा है। इसके आठ मिशन हैं। इसमें से एक अगले दस वर्षों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से 20,000 मेगावाट की बिजली पैदा करने का है।
प्रधानमंत्री के अनुसार रियो शिखर सम्मेलन में तय किए गए लक्ष्य 20 वर्ष बाद भी पूरे नहीं हुए। आज इन मुद्दों पर वैश्विक सहमति बनाना ज्यादा कठिन है। फिर भी इस बीच लोगों में जागरूकता बढ़ी है। सतत विकास का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं का अहम हिस्सा बना है।
पीएम ने यूपीए सरकार द्वारा क्योटो समझौते के तहत किए गए वायदे पूरा करने का आश्वासन भी दिया। साथ ही कहा कि वर्ष 2020 तक हम अपने उत्सर्जन की मात्रा सकल घरेलू उत्पाद के 20-25 फीसदी तक नीचे लाएंगे। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं। जरूरी है कि अमीर औद्योगिक देश भी इस दिशा में काम करें।
मालूम हो कि सतत विकास पर टेरी 13वां शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है। महानिदेशक डॉक्टर आरके पचौरी ने बताया कि हम खुशकिस्मत हैं कि दुनिया के सभी हिस्सों के विशेषज्ञ एक साथ मौजूद हैं। इससे वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की कारगर रणनीति तैयार होने की उम्मीद है।