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चीन ने दिलाया भरोसा, कम नहीं होगी ब्रह्मपुत्र की धार

Thu, 28 Mar 2013 11:11 PM IST
डरबन से उदय कुमार
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के नए राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बुधवार को हुई मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों में गरमाहट ला दी।
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जिनपिंग के संग करीब 45 मिनट चली मुलाकात में प्रधानमंत्री ने चीन के हिस्से में ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रस्तावित तीन नए बांधों के निर्माण का मुद्दा उठाया।

इस पर चीन के राष्ट्रपति ने मनमोहन सिंह को भरोसा दिलाया कि भारत में ब्रह्मपुत्र के पानी की धार कम नहीं होगी।

जिनपिंग ने मनमोहन सिंह को सम्मान देते हुए कहा कि आपको चीन में विद्वान राजनीतिज्ञ की तरह देख जाता है।

















यही कारण है कि विभिन्न सम्मेलनों के दौरान (चीन के) पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ और पूर्व प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से आपकी हुई मुलाकातों ने एशिया के दो महत्वपूर्ण पड़ोसियों में अच्छा संवाद स्थापित किया है।

जिनपिंग ने प्रधानमंत्री से कहा कि इसी वजह से उन्होंने पद संभालने के बाद सबसे पहले सिंह से मिलने की इच्छा जताई थी।

उन्होंने मनमोहन सिंह को चीन आने का निमंत्रण दिया। मनमोहन सिंह ने जब जिनपिंग को भारत आने का न्योता दिया तो उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया।

रिश्ते बढ़ाएंगे, सीमा विवाद सुलझाएंगे
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात को लेकर इतनी तैयारी से आए थे कि उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती देने के लिए पूरा फार्मूला ही सुझा दिया।
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जिनपिंग के मुताबिक दोनों देशों के बीच प्रतिभाओं और युवाओं का आना-जाना (यूथ एक्सचेंज) बढ़े तो सीमा विवाद खत्म करने में भी देर नहीं लगेगी।

उन्होंने मनमोहन सिंह से कहा कि दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों में जल्द बात होनी चाहिए। इस पर पीएम ने साथ में मौजूद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की ओर इशारा किया।

जवाब में जिनपिंग ने भारत से बातचीत के लिए चीन के नए सीनियर रिप्रजेंटेटिव (एसआर) का परिचय करा दिया।

भारत का जोर इनफ्रास्ट्रक्चर पर
सूत्रों ने बताया कि जिनपिंग से पहली मुलाकात में प्रधानमंत्री मंझे अर्थशास्त्री की तरह पेश आए।

उन्होंने भारत के इनफ्रास्ट्रक्चर विकास में निवेश का मसला उठाया और उम्मीद जताई कि चीन के नए राष्ट्रपति भी इसी को अपने एजेंडे में रखेंगे।

जिनपिंग ने विश्वास बहाली के लिए दोनों देशों की सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास का सुझाव दिया। दोनों नेताओं के बीच बातचीत मुख्यत: विकास और आपसी सहयोग पर ही केंद्रित रही।
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