ब्रिक्स ने नए विकास बैंक की स्थापना करने का फैसला किया। दो दिन के विमर्श और शिखर सम्मेलन के बाद ब्रिक्स ने अपना घोषणा पत्र जारी किया। इसमें विकास बैंक के गठन पर सहमति और बिजनेस काउंसिल के गठन को उपलब्धि बताया गया।
ब्रिक्स देशों ने आपातकालीन ऋण संकट के समय आपस में मदद के लिए 100 अरब डॉलर के आर्थिक कोष की व्यवस्था किए जाने पर भी सहमति जताई। इसके अलावा अफगानिस्तान और फिलीस्तीन के हालातों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपनी राय को शामिल करके ब्रिक्स ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी बड़ी भूमिका का संकेत दे दिया। प्रस्ताव में ड्रग्स तस्करी, पाइरेसी और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया गया।
डरबन में भारत, ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका के शासनाध्यक्षों की बैठक के बाद बुधवार को जारी घोषणा पत्र में ब्रिक्स के वित्तमंत्रियों की खासतौर पर प्रशंसा की गई जिनके प्रयासों से इन उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने एक साथ विकास की राह पर चलना शुरू किया है।
इसमें पांचों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच नियमित अंतराल पर बैठकें, निजी क्षेत्र की सहभागिता से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ग्रीन एनर्जी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर एक साथ काम करने का संकल्प शामिल है। शिखर सम्मेलन में विकासशील देशों में भ्रष्टाचार को बड़ी बीमारी बताया गया और इससे मुक्ति के रास्ते तलाशने की बात की गई। इसके अलावा यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम चलाने और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की बात भी घोषणा पत्र में शामिल की गई।
‘झटकों’ से निपटने को 100 अरब डॉलर
विकास के एजेंडे पर बढ़ने को ब्रिक्स देश कितने गंभीर हैं यह इससे पता चलता है कि वे समझौतों को लागू करते समय होने वाले संभावित उतार-चढ़ाव से निपटने की तैयारी अभी से कर लेना चाहते हैं। पहले वित्त मंत्रियों की बातचीत और फिर शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के बीच अपनी मुद्रा में आयात-निर्यात शुरू करने की दशा में एकाएक ‘झटका’ लगने के खतरे की बात सामने आई। इसके अलावा भी वैश्विक मुद्राओं के उतार-चढ़ाव की दशा में ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देने के लिए 100 अरब डॉलर की आकस्मिक व्यवस्था की गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान चीन कर रहा है।
बढ़ाएंगे अफ्रीकी देशों से कारोबार
ब्रिक्स और दक्षिण अफ्रीकी देशों के बीच हुई वार्ता में करीब 500 प्रोजेक्टों में सात करोड़ डॉलर के निवेश पर सहमति बनी। दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर बाकी के अफ्रीकी देशों में ब्रिक्स देशों से अब तक महज 6 फीसदी ही निवेश होता है। इसे बढ़ाने के लिए चीन समेत कई देशों ने रुचि दिखाई। भारत के एक निजी उद्योग समूह ने दक्षिण अफ्रीका पोर्ट सिटी में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाने का एमओयू साइन किया है।