मनमोहन सरकार की नई टीम को लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में गहमागहमी जारी है। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के बाद सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक, पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय तथा सामाजिक न्याय राज्यमंत्री महादेव खंडेला ने भी प्रधानमंत्री को अपने इस्तीफे सौंप दिए।
उधर, कृष्णा के इस्तीफे के बाद वाणिज्य, उद्योग व कपड़ा मंत्री आनंद शर्मा अब विदेश मंत्री के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि उनके साथ मानव संसाधन विकास व दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल और कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी विदेश मंत्री की दौड़ में शामिल हैं, लेकिन अभी तक आनंद शर्मा का पलड़ा इन दोनों नेताओं से भारी पड़ता दिख रहा है।
सूत्रों के अनुसार बाहरी देशों के साथ बेहतर संबंधों के लिहाज से खुर्शीद या सिब्बल के मुकाबले शर्मा का रिकॉर्ड कहीं बेहतर कहा जा सकता है। पाकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्तों के जरिए संबंधों में सुधार का भी कुछ हद तक श्रेय शर्मा को मिला है। वहीं, सलमान खुर्शीद पहले ही एनजीओ विवाद में घिर चुके हैं और सिब्बल का विदेश अनुभव शर्मा के मुकाबले कम है।
वहीं, दूसरी तरफ आनंद शर्मा के विदेश मंत्री बनने पर वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी शहरी विकास मंत्री कमलनाथ या फिर ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश को दी जा सकती है। कमलनाथ का प्रमोशन भी हो सकता है, उन्हें संसदीय कार्य मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिल सकता है। अभी संसदीय कार्य मंत्रालय पवन बंसल के पास है। बंसल के पास जल संसाधन मंत्रालय भी है।
सूत्रों के मुताबिक खेल मंत्री अजय माकन और मुनिअप्पा कैबिनेट मंत्री बनाए जाएंगे। अभी अजय माकन के पास खेल मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार है, जबकि के एच मुनिअप्पा रेल राज्य मंत्री हैं। इस बीच खबर ये भी है कि कांग्रेस सांसद कोटला सूर्यप्रकाश रेड्डी, बलराम नाइक, अबु हसम खान चौधरी और एनसीपी कोटे के तारिक अनवर मंत्री बनेंगे।
कैबिनेट की इस फेरबदल में सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा का दर्जा बढ़ाए जाने की भी खबर है। सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा को प्रमोशन देकर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया जा सकता है। दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे कपिल सिब्बल से शिक्षा मंत्रालय लेकर वीरप्पा मोईली या किसी और को सौंपने पर विचार हो रहा है।
दरअसल यह सारी कवायद 2014 की लड़ाई नई टीम के साथ लड़ने के लिए की जा रही है। भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष और सिविल सोसायटी के निशाने पर आए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब नई टीम के साथ मुकाबले में उतरना चाहते है, ताकि वक्त रहते सूरत बदलने के संदेश के साथ अच्छी सीरत का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए सरकार के साथ-साथ कांग्रेस संगठन में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल की जा रही है।
जिस तरह मनमोहन सरकार में राहुल गांधी के हिसाब से फेरबदल हो रहा है, उसी तरह से संगठन में भी उनके हिसाब से टीम बनाई जा रही है। संभावना इस बात की ज्यादा है कि राहुल गांधी को पार्टी में नंबर दो की हैसियत आधिकारिक तौर पर दे दी जाए।