आदमखोर बाघिन को पिंजरे में कैद करने या शूट करने का वन अधिकारियों का ऑपरेशन फ्लॉप हो गया। पिंजरे में कैद होना तो दूर कांबिंग कर रही टीमों को बाघिन दिखाई तक नहीं दी।
छह लोगों की जान ले चुकी बाघिन के आतंक के चलते जिलाधिकारी के आदेश पर जसपुर एसडीएम ईवा शाह ने उत्तराखंड-यूपी के बार्डर से लगे पतरामपुर क्षेत्र के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में सोमवार को अवकाश घोषित कर दिया।
कहां है बाघिन, कुछ पता नहीं
सहाय ने बताया कि आदमखोर बाघिन की स्पष्ट लोकेशन प्राप्त नहीं हुई है। वह अभी यूपी के सीमावर्ती क्षेत्र में है या पतरामपुर क्षेत्र में, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
यूपी के वन अधिकारी कभी अमानगढ़ वन रेंज तो कभी पतरामपुर वन रेंज में बाघिन के चले जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
उधर ग्रामीणों में वन्य अधिकारियों के प्रति भारी आक्रोश और आदमखोर बाघिन से दहशत है। पांच दिन से ग्राम मानियावाला, भक्तावाला, चंडका, खैराबाद गांवों के जंगलों में उसकी लोकेशन वन्य अधिकारियों ने ट्रेस की थी।
उसे कैद करने के लिए पिंजरे मंगवाए गए और शूट करने के लिए शिकारी बुलाए थे। लेकिन पांच दिन से लगातार कांबिंग के बाद कोई सफलता हाथ नहीं लगी।
गुस्साए लोगों ने तोड़ा मचान
वन विभाग ने आदमखोर बाघिन को ट्रेस करने के लिए बीते रविवार को ग्राम मानियावाला गढ़ी के जंगल में मचान बनाए और भैंसे को गन्ने के खेत के बाहर बांधकर तीन तरफ से घेराबंदी की थी।
सोमवार तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिली तो अधिकारियों ने कहना शुरू कर दिया कि आदमखोर बाघिन अमानगढ़ वन रेंज में पहुंच गई।
इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने वन्य कर्मियों द्वारा बनाया गया मचान तोड़ दिया। इसके बाद लाठी-डंडे और बंदूकें लेकर अपने खेतों की ओर निकल पड़े।
दो शूटर वापस, अब अफजलगढ़ में कैंप
सोमवार को दो शूटर उत्तराखंड के हरीश ध्यानी और राणा प्रताप सिंह वापस हो गए हैं। जबकि मंडावर के अनदान अली और शेरकोट के सादबिन आशिफ अभी मोर्चा थामे हैं।
अधिकांश अधिकारियों ने मानियावाला स्टेशन को बदलकर अफजलगढ़ में कैंप करना शुरू कर दिया है। वन संरक्षक कमलेश कुमार मुरादाबाद और ब्रह्म सिंह डीएफओ मुरादाबाद फोर्स के साथ कैंप में मौजूद हैं।