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ममता निकालेंगी तीसरे मोर्चे की हवा

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वाम दलों को तीसरे विकल्प की राजनीति की अगुवाई से दूर कर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी खुद गैरभाजपा-गैरकांग्रेस विरोधी दलों का केंद्र बनने की कोशिश में जुट गई हैं। इसके लिए ममता ने हाल ही में संसद में बने भाजपा-कांग्रेस विरोधी ब्लॉक में शामिल दलों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
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उनकी निगाह उन गैरभाजपा-गैरकांग्रेस दलों पर भी है, जो अब तक वाम दलों की अगुवाई वाले ब्लॉक में शामिल नहीं हुए हैं। उनकी पहली कोशिश अपने फेडरल फ्रंट को मजबूत बनाने के लिए भाजपा-कांग्रेस विरोधी ब्लॉक में शामिल गैर वाम दलों को पटाने की है।

इस मुहिम के तहत ममता एजीपी, जेवीएम और बीजेडी नेताओं से लगातार संपर्क साध रही हैं। इसके अलावा उनकी निगाह टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों पर भी है, जिन्होंने अभी किसी गठबंधन से नाता नहीं जोड़ा है।
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अस्तित्व में आ सकते हैं कई गठजोड़

तीसरे विकल्प की राजनीति की अगुवाई के लिए जिस प्रकार होड़ मची है, उससे लोकसभा चुनाव से पूर्व ऐसे कई गठजोड़ अस्तित्व में आ सकते हैं। ममता और वाम दल जहां गैरभाजपा-गैरकांग्रेस मोर्चा खड़ा करने के प्रयास में है, वहीं 'आप' मुख्य धारा के सभी दलों के खिलाफ मोर्चा खड़ा करने की कोशिश में है।

ममता के लिए सुखद स्थिति यह है कि भाजपा-कांग्रेस विरोधी ब्लॉक में शामिल कई दलों ने अंतिम रूप से एक साथ्‍ा आने का मन नहीं बनाया है। खासतौर से बीजेडी, एजीपी और जेवीएम शामिल हैं। कई गैरकांग्रेस-गैरभाजपा दल फिलहाल ऐसे सभी संभावित मोर्चे से दूर हैं।

तृणमूल सूत्रों के मुताबिक ममता की योजना फेडरल फ्रंट में वामदलों की अगुवाई में बनने वाले मोर्चा से अधिक दलों को शामिल करना है। इससे बीते कई दशकों से तीसरे विकल्प की राजनीति करते आ रहे वाम दलों का बड़ा आधार टूटेगा। अन्ना हजारे के साथ आने से भी ममता का मनोबल बढ़ेगा।
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