जिलाधिकारी और पांच पुलिस अधीक्षकों के स्थानांतरण के मसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव आयोग से भिड़ गई हैं।
अधिकारियों के स्थानांतरण से साफ इनकार करते हुए ममता ने आयोग पर आरोप लगाया है कि वह कांग्रेस और भाजपा के हाथों खेल रहा है। आदेश का पालन नहीं होने से चुनाव आयोग भी सख्त हो गया है और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग उन इलाकों में चुनाव स्थगित भी कर सकता है।
ममता ने आयोग की सीमा याद दिलाते हुए कहा कि वह एक मुख्यमंत्री हैं और आयोग चाहे तो इस पद की भूमिका भी निभा सकता है। उन्हें सत्ता का लालच नहीं है।
'मैं धमकियों से डरने वाली नहीं'
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य 8 अधिकारियों के तबादले को लेकर चुनाव आयोग के बयान को लेकर अब नया बयान दिया है। ममता ने कहा है कि वह उनकी सरकार दिल्ली से मिलने वाली धमकियों से डरने वाली नहीं है।
पुरुलिया में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'मुझे पता है संविधान क्या है, हम संविधान का पालन करते हैं और जितना जरूरी है उसे संमान भी देते हैं। मैं जब तक जिंदा रहूंगी सिर उठा कर जियूंगी।'
ममता रैली के दौरान चुनाव आयोग पर पक्षपात करने का भी आरोप लगया। उन्होंने कहा कि देश में 2-3 लोग ऐसे हैं जो देश को बेचने वालों की मदद ले रहे हैं लेकिन चुनाव आयोग उन लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।
आयोग के आदेश पर उठाए सवाल
बर्दवान जिले में एक रैली में ममता ने कहा कि राज्य सरकार से सलाह किए बिना अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश दे दिया गया है।
उन्हें इस बैठक में पता चला कि आयोग ने पांच एसपी के स्थानांतरण का आदेश दिया है और उनकी जगह नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों के नामों की घोषणा भी कर दी है।
वह आयोग का सम्मान करती हैं, लेकिन वह झुकेंगी नहीं। वह पूछेंगी कि क्या आप केवल कांग्रेस की सुनेंगे जिससे कि कांग्रेस और भाजपा की जीत सुनिश्चित हो सके।
जेल जाने को तैयार ममता बनर्जी
ममता ने कहा कि वह एक मुख्यमंत्री हैं और वह किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि आयोग की एक सीमा है।
उन्होंने कहा कि आप मुख्यमंत्री की भूमिका में आ जाइए। वह सत्ता की परवाह नहीं करती। उन्होंने कहा कि यह एक मीडिया हाउस, केंद्र सरकार, कांग्रेस, चुनाव आयोग, भाजपा और माकपा का एक षड्यंत्र है। वह अकेले लड़ेंगी। वह किसी षड्यंत्र की नहीं लोगों की परवाह करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग अगर कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल ले तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। अगर कोई समस्या पैदा होगी तो ममता बनर्जी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि या तो ममता बनर्जी कानून-व्यवस्था देखेंगी या फिर चुनाव आयोग देखे। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस या आपकी दया से सत्ता में नहीं आई है। उन्होंने यहां तक कहा कि वह गिरफ्तार होने और जेल जाने तक के लिए तैयार हैं।
विपक्ष ने की ममता की आलोचना
अधिकारियों के स्थानांतरण के मसले पर चुनाव आयोग को चुनौती देने वाली ममता की विपक्षी दलों ने आलोचना की है। विपक्ष ने ममता के रुख को असंवैधानिक और दबंगई करार दिया है।
जादवपुर से माकपा उम्मीदवार सुजान चक्रबर्ती ने कहा कि वाम दलों के शासन में भी चुनाव के दौरान आयोग ने एसपी और डीएम का स्थानांतरण किया था। उस वक्त टीएमसी ने स्थानांतरण का स्वागत किया था। लेकिन वही टीएमसी अब सत्ता में है और स्थानांतरण का विरोध कर रही है। यह असंवैधानिक और दबंगई है। माकपा इसकी आलोचना करती है।
उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग को लगा था कि वर्तमान प्रशासनिक ढांचे में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता। इसलिए उसने कुछ अधिकारियों के स्थानांतरण का फैसला किया। यह कोई राजनीतिक फैसला नहीं है। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए आयोग द्वारा लिया गया फैसला है।