सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजी गई मलाला युसुफजई ने नोबेल अवार्ड कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया है।
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शुक्रवार को पुरस्कारों की घोषणा के बाद मलाला ने कहा, 'मैंने अनुरोध किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ दोनों ही नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाते समय वहां मौजूद हों। मैं वास्तव में शांति में यकीन करती हूं।'
उल्लेखनीय है कि शांति का नोबेल का पुरस्कार दक्षिण एशिया में ऐसे वक्त आया है, जब दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा पर कई दिनों से गोलीबारी हो रही हैं, जिसमें कई नागरिकों की जान जा चुकी है।
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नोबेल शांति पुरस्कारों को भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने के लिए दोनों मुल्कों के राजनीतिक नेतृत्व द्वारा पहल करने की अपील भी माना जा रहा है।
हालांकि नोबेल पुरस्कार समिति का ये प्रयास फलीभूत हो पाएगा या नहीं, ये भविष्य ही बताएगा। 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर नार्वे की राजधानी ओस्लो में कैलाश सत्यार्थी और मलाला युसुफजई को पुरस्कार दिया जाएगा।
मलाला की मंशा पूरी करने के लिए पुरस्कार समारोह में मोदी और नवाज मौजूद होंगे या नहीं, परखते हैं संभावनाओं को।
फिर हो पाएगी मोदी और नवाज की दोस्ती?
नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रवैया अख्तियार किया था। लेकिन प्रधानमंत्री बनते ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को शपथ ग्रहण में बुलाकर चौंका दिया।
मोदी ने नवाज शरीफ समेत सार्क देशों के सभी नेताओं को शपथग्रहण में शामिल होने का निमंत्रण भिजवाया। नई सरकार की वह पहल दक्षिण एशिया में शांति स्थापना की कोशिश के रूप में देखी गई थी।
अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी मोदी के प्रयासों की सरहना की गई। उस यात्रा मे नवाज शारीफ और मोदी के बीच द्वीपक्षीय मुद्दों पर बात भी हुई। यूपीए सरकार के कार्यकाल में ठप पड़ चुकी भारत-पाकिस्तान की वार्ता को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनीं।
..तब पाकिस्तान ने ही फेर दिया था पानी
भारत और पाकिस्तान सचिव स्तर की बातचीत के लिए तैयारियां कर रहे थे। उसी समय भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने कश्मीर की अलगाववादी पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं को मुलाकात के लिए आमंत्रित किया। पाकिस्तानी उच्चायुक्त की पहल का भारत में कड़ा विरोध किया गया।
नतीजतन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद विदेश मंत्रालय ने वार्ता रद्द कर दी। शांति की दिशा में किए गए प्रयासों पर पानी फिर गया। हालांकि भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजें बंद नहीं किए।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दोनों मुल्कों के बीच बातचीत दोबारा शुरु करने का संकेत भी दिया। हालांकि पाकिस्तान तमाम प्रयासों पर पानी फेरने पर तुला रहा। जुलाई और अगस्त महीने में पाकिस्तान में राजनीतिक उथलपुथल के हालात बने और पाकिस्तानी रेजर्स ने भारत में गोलीबारी शुरु कर दी।
सीमा पर गोलियां भी खूब बरसाईं
महीने भर पहले पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बन गया था।
विपक्ष के नेता इमरान खान और ताहिर उल कादरी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से इस्तीफे की मांग करते हुए इस्लामाबाद में घेरा डाल दिया। पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता का असर जम्मू में भारत और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दिखा।
सीमा पर कई बार गोलीबारी की गई, जिसमें नागरिकों समेत भारतीय सेना के जवानों की भी मौत हुई। पाकिस्तानी सेना की नापाक हरकतों ने दोनों मुल्कों की बीच की नफरत की दरार और चौड़ी कर दी।
नवाज ने यूएन में छेड़ा कश्मीर राग
सितंबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्युयॉर्क संयुक्त राष्ट्र महसभा में हिस्सा लिया। पकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी वहीं थे। उम्मीद जताई गई की दोनों नेताओं के बीच मुलाकात होगी और बातचीत की रास्ता फिर खुलेगा।
लेकिन भारत सरकार ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से किसी भी प्रकार की बातचीत से इनकार कर दिया। दोनों मुल्कों की कड़वाहट तब और बढ़ गई, जब संयुक्त राष्ट महासभा के मंच पर नवाज ने कश्मीर में जनमत संग्रह का राग छेड़ दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में दिए अपने भाषण में पकिस्तान जमकर लताड़ा। शांति के प्रयासों को उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पाकस्तान जब तक आतंकवाद बंद नहीं करता, उससे बात नहीं हो सकती।
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर पड़ी बर्फ पिघलती, इससे पहले पाकिस्तानी सेना पिछले हफ्ते भारतीय सीमा पर भयंकर गोलीबारी की, जिसमें आठ नागरिकों की मौत हो गई।
भारत ने भी पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब दिया। उनकी ओर के नागरिक भी मारे गए। दोनो मुल्कों की सेनाओं की गोलीबारी और नेताओं की जुबानी बमबारी में शांति के परखचे उड़ गए।
फिलहाल सीमा के दोनों ओर के कई गांवों को खाली कराया जा चुका है। लोग अपने घरों को छोड़कर राहत शिविरों में रह रहे हैं। दोनों देशों की सरकारें अपनी-अपनी सेनाओं के साथ बैठकें कर रही हैं।
मलाला ने इन्हीं चीजों की बीच मोदी और नवाज से एक मंच पर आने की अपील की है। वह मंच नोबेल पुरस्कार समिति का मंच है, जहां शांति के प्रयासों का पुरस्कृत किया जाएगा।
मोदी और नवाज मलाला की इच्छा को पूरा करते हैं या नहीं, ये कयास वक्त को ही लगानें दें। बस सीमा पर शांति बनी रहे।