गंगा की अविरल और निर्मल धारा को लेकर गंगासागर से गंगोत्री तक की यात्रा करने के बाद भाजपा नेता उमा भारती ने गंगा के लिए केंद्र में अलग मंत्रालय बनाने का राग शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण को अभी गंगा तक सीमित कर देना चाहिए। गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के बाद उसी मॉडल को अन्य नदियों पर भी लागू करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गंगा समेत सभी नदियों की दुर्दशा को देखते हुए इसके लिए केंद्र में अलग मंत्रालय बनाने की आवश्यकता है, वैसे केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय में भी गंगा के लिए अलग से विशेष व्यवस्था से भी काम चल सकता है। गंगा यात्रा की समाप्ति के बाद दिल्ली आई उमा ने कहा कि इस अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा। अब आगामी 20 नवंबर को दिल्ली में गंगा के प्रदूषण को लेकर वैज्ञानिकों का सम्मेलन होगा।
इस सम्मेलन की रिपोर्ट राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भाजपा ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को सौंपी जाएगी। इसके बाद दो दिसंबर को गंगा के किनारे एकत्रित होकर लोग इस नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि वह गंगा पर बनने वाले बांधों के खिलाफ नहीं है, लेकिन इससे गंगा की अविरल धारा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उमा ने कहा कि गंगा भारतीय संस्कृति और पहचान से जुड़ी है। यदि सत्तापक्ष, विपक्ष और जनता के साथ हो जाएं तो गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च किये गये हैं, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो इसका समाधान निकाला जा सकता है।
गडकरी के समर्थन में उमा
भाजपा नेता उमा भारती भी पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के समर्थन में कूद पड़ी हैं। उमा ने कहा कि खुद को जांच के लिए प्रस्तुत करके गडकरी ने एक आदर्श पेश किया है, इसलिए अब बाकी नेताओं के दामाद, भाइयों को भी ऐसा करने का ऐलान करना चाहिए।
गंगा यात्रा के समापन के बाद पार्टी मुख्यालय पहुंची उमा ने कहा कि भाजपा नेताओं ने तो हमेशा ही नैतिकता के मानदंडाें का उदाहरण पेश किया। खुद का उदाहरण देते हुए उमा ने कहा कि उन पर तिरंगा फहराने को लेकर एक धारा के उल्लंघन का आरोप था और उसी पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ दी। उमा ने कहा कि जांच की जैसी बात गडकरी ने कही अब वो बात अन्य दलों के नेताओं के मुंह से क्यों नहीं सुनाई दे रही है।