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फेरबदल में काम के साथ देखी गई वफादारी भी

Sun, 28 Oct 2012 10:50 PM IST
नई दिल्ली/संजय मिश्र
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यूपीए-दो सरकार के आखिरी ही नहीं सबसे बड़े फेरबदल को कांग्रेस राहुल गांधी की छाया के साथ जेनरेशनल चेंज की ओर कदम बढ़ाने का आगाज बता रही है। मगर हकीकत यह भी है कि इस बदलाव में भी केवल काम ही नहीं, पार्टी हाईकमान के प्रति वफादारी को कसौटी पर परखा गया है। इसीलिए चुनावी लिहाज से हुए इस फेरबदल में भी निष्ठा और काम को ईनाम दिया गया है।
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वहीं सियासी संकटों के दौर में सामने आकर मोर्चा थामने वालों के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। तो आरोपों की गंभीर सियासी चुनौतियों से जूझते अपने चेहरों के साथ खड़ा होकर कांग्रेस हाईकमान ने मिशन 2014 की राजनीतिक जंग के लिए जवाबी प्रहार को ही बचाव का अस्त्र बनाने का संदेश दिया है। सलमान खुर्शीद, शशि थरूर, हरीश रावत और मनीष तिवारी की सत्ता केंद्र में स्थापना संतुलन साधने की कांग्रेस की सियासत का नमूना है।

जाहिर है कि सरकार की यह सियासी सर्जरी कांग्रेस की अपनी राजनीतिक लाइन-लेंथ के हिसाब से सिरे चढाई गइ है। यह कांग्रेस हाईकमान के प्रति निष्ठा का इजहार करना ही रहा कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद से वंचित किए जाने के बाद हरीश रावत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है तो अश्विनी कुमार को वफादारी का ईनाम देते हुए राज्यमंत्री से सीधे कैबिनेट की छलांग लगवाते हुए कानून मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण मकहमा सौंपा गया है। के रहमान खान की निष्ठा ने भी उनके कैबिनेट में आने की राह बनाई।
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इसी तरह अन्ना हजारे के आंदोलन को आक्रामक अंदाज में ध्वस्त करने की शुरुआत करने वाले कांग्रेस प्रवक्ता रहे मनीष तिवारी को सीधे स्वतंत्र प्रभार के साथ सूचना प्रसारण जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंप यह संदेश भी दिया गया है कि  पार्टी काबिलियत की परख भी रखती है। यह अलग बात है कि तब अन्ना पर वार के लिए मनीष को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

मगर बाद में अन्ना का आंदोलन ध्वस्त करने में कांग्रेस की यही आक्रमकता काम आई। फेरबदल में सरकार में पीढ़ीगत बदलाव यानी जेनरेशनल चेंज के कांग्रेस के दावे की अनदेखी नहीं की जा सकती। पल्लम राजू, अजय माकन, मनीष तिवारी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, भरत सोलंकी और जितेन्द्र सिंह जैसे युवा चेहरों को कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार के साथ अहम मंत्रालय सौंपा जाना इसी बदलाव का हिस्सा है।

काम आया कुर्बानी की जज्बा
रार्बट वाड्रा प्रकरण में गांधी परिवार के लिए अपनी जान कुर्बान करने का जज्बा जाहिर करने वाले सलमान खुर्शीद को विदेश मंत्री के रूप में सरकार के शीर्ष चार चेहरों की पंक्ति में खड़ा कर दिया गया है। वस्तुत: खुर्शीद के साथ खड़े होकर हाईकमान ने साफ संदेश दिया है कि महज आरोपों के आधार पर वह अपने नेताओं की बलि नहीं लेगी।
आईपीएल गेट के बाद एक बार फिर शशि थरूर को दुबारा मंत्री बनाना भी इसी का संकेत है। यह कांग्रेस हाईकमान के प्रति निष्ठा ही रही है कि कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को हाईकमान ने तमाम सियासी चुनौतियों के बावजूद पद पर बनाए रखा है।
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