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15 दिन से कब्र पर क्यों बैठा है टॉमी?

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लगभग 15 दिन से ज्यादा का वक्त हो गया है लेकिन एक कब्र अब भी सूनी नहीं हुई है। मरने वाले का 'साथी' पिछले बीते वक्त से वहीं बैठा हुआ है। बिना कुछ खाए, भूखे और प्यासे। चाहे बारिश हुई हो या सूरज तप रहा हो लेकिन एक 'दोस्त' अपने मालिक के मरने के बाद उसकी कब्र पर उसी तरह बैठा हुआ है। वह एक 18 साल का लड़का था जिसने कब्र पर बैठे उस वफादार साथी, अपने प्यारे कुत्ते को एक समय गोद लिया था।
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टीओआई में छपी खबर के अनुसार चेन्नई में मालिक के मरने के बाद भी उसका प्यारा कुत्ता पिछले एक पखवाड़े से वहीं बैठा हुआ है। और कुत्ते और मालिक की यह दोस्ती सुर्खियों का विषय बनी हुई है।

जब कुछ स्थानीय लोगों ने कुत्ते को वहां देखा और उसे वहां से हटाने की कोशिश की तो वह टस से मस नहीं हुआ और लोगों पर गुर्रा कर वापस वहीं बैठ गया।
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कार एक्सीडेंट में हुई मौत

जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था को जब इस बारे में जानकारी हुई तो वे घटना की जगह पहुंचे। कुछ स्थानीय लोगों से बातचीत के बाद उन्हें मालूम हुआ कि मृतक भास्कर की मौत 2 अगस्त को एक कार एक्सीडेंट में हुई थी। और यह पालतू कुत्ता भास्कर का ही है।

जब टीम के कुछ लोग भास्कर की मां से मिले। उन्हें पता चला कि भास्कर ने पांच साल पहले 'टॉमी' को गोद लिया था। और पांच सालों तक भास्कर के ही साथ था।

जब भास्कर की मौत हुई तो ट़ॉमी कहीं चला गया था। और वह जब लौटकर आया वह तब से वहीं भास्कर की कब्र पर बैठा हुआ है।

भास्कर की मां एक विधवा हैं। टीम से बात करते हुए वे रोती हैं और टीम के सदस्यों को बताती हैं कि बेटे के जाने के बाद अब जीने की कोई वजह नजर नहीं आती। लेकिन टॉमी भास्कर के बहुत करीब और वफादार था। शायद अब इसी के साथ जिंदगी काटी जा सकती है।

पेटा इंडिया की सीईओ पूर्वा जोशीपुरा कहती हैं कि कुत्ते इंसानों की तरह बहुत से अहसासों को समझते हैं। वे प्यार कर सकते हैं। दुख और तकलीफ को भी बहुत अच्छे से समझ पाते हैं। और भास्कर और टॉमी की इस घटना के बाद लोग इस बात को और बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और शायद जानवरों से बेहतर बर्ताव कर पाएंगे।
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