लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की बाढ़ आ गई है। बाबाओं, बिल्डर्स से लेकर प्रॉपर्टी डीलर्स और सेवानिवृत्त नौकरशाह भी अपना-अपना दल खड़ा करने की होड़ में लगे हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक चुनाव आयोग के पास पिछले दो महीनों में 142 राजनीतिक दल पंजीकृत हो चुके हैं। अगस्त-सितंबर में राजनीतिक दलों की संख्या 1392 थी जो नवंबर मध्य तक बढ़कर 1534 हो चुकी है।
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक आशंका है कि इतने दलों के बनने के पीछे केवल राजनीतिक वजह नहीं है बल्कि कारोबार भी है। एक दल बनाने के लिए केवल ग्यारह सदस्यों की जरूरत होती है ऐसे में दल बनाना आसान हो जाता है।
हाल ही में रेप मामलों में आरोपी आसाराम के बेटे नारायण साईं ने भी एक राजनीतिक दल 'ओजस्वी पार्टी' बनाई है। एक पूर्व नौकरशाह दिल्ली में बसपा प्रमुख है और मुंबई में एक बिल्डर भारतीय लोक पार्टी के अध्यक्ष हैं।
'राजनीति का कारोबार में फायदा'
दिल्ली के बुराड़ी में डॉन माने जाने वाले प्रॉपर्टी डीलर महेश त्यागी का दावा है कि उनकी भारत विकास पार्टी(एस) के चार हजार सदस्य हैं। त्यागी का कहना है कि वो दस लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे।
शुक्रवार को पार्टी के ऑफिस उपकार प्रॉपर्टीज में बैठे त्यागी बिना हिचक कहते हैं कि राजनीति करोबार में मदद करती है। आप ज्यादा बेहतर जानते हैं।
चुनाव आयोग को दिए गए विभिन्न दलों के अध्ययन के मुताबिक कई दलों ने साल 2009 से 2012 के बीच राजनीतिक कार्यों पर कोई खर्चा ही नहीं किया।
साल 2009 के आम चुनाव परिणामों के अनुसार उस समय के 1250 में 1150 दलों को मात्र एक प्रतिशत वोट ही मिले।
काला धन कर रहे सफेद
चुनाव आयोग के विश्लेषण के मुताबिक 200 नई राजनीतिक पार्टियों में से केवल 16 प्रतिशत ही राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हैं। कई अन्य का उद्देश्य स्टॉक एक्सचेंज, रियल स्टेट में निवेश के लिए पैसा बनाना या काले धन को सफेद करना है।
राजीतिक दल की आड़ में कुछ दलों को गुप्त स्रोतों से डोनेशन भी मिला है। गाजियाबाद की इंडियन यूथ पार्टी को अरुणाचल प्रदेश की एक कंपनी से साल 2012 में 15 लाख रुपए डोनेशन मिला है। राष्ट्रीय विकास पार्टी को एक कंपनी से दो महीनों के अंदर 1.25 करोड़ रुपए डोनेशन मिला है।
एक अन्य पार्टी को डोनेशन के तौर पर सोने और हीरे के जेवर मिले हैं।
शेयर बाजार में लगा पैसा
पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी का कहना है कि आयोग के पास प्रमाण हैं कि कुछ दलों को मिला डोनेशन शेयर बाजार में निवेश, प्रॉपर्टी या जेवर खरीदने में इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने बताया कि आयोग ने सरकार को सलाह दी थी कि इन दलों को मनी लॉन्डरिंग कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
वित्त मंत्रालय ने इससे इनकार करते हुए कहा है कि यह कई और पिटारे खोल देगा।