मिशन 2014 के लिए भाजपा को सिर्फ जीतने वाले उम्मीदवार चाहिए। पार्टी को ‘बाहरी’ प्रत्याशियों पर भी दांव लगाने से परहेज नहीं है। अलबत्ता उसमें चुनाव जीतने का दमखम हो।
दिल्ली तख्त के लिए अपने पुराने रुख में बदलाव कर पार्टी अब ‘साफ छवि’ के प्रत्याशियों की बजाए ‘जीतने वाले’ उम्मीदवार तलाश रही है।
इसके लिए भाजपा की नजर अन्य दलों के नेताओं पर भी है। पार्टी ने गुपचुप तरीके से एक स्क्रीनिंग कमेटी गठित कर दी है। कमेटी दल-बदलुओं को पार्टी में शामिल करने से पहले उनकी जांच करेगी।
कमेटी ऐसे नेताओं के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों का अध्ययन कर पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट देगी। इसमें बताया जाएगा कि ये नेता जीतने का दमखम रखते हैं अथवा नहीं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए बाबूसिंह कुशवाहा और बादशाह सिंह प्रकरण के बाद पार्टी नेतृत्व इस बार ‘बाहरी’ उम्मीदवारों को लेकर पहले ही पूरी जानकारी जुटा लेना चाहता है। उत्तर प्रदेश में भाजपा को अब कांग्रेस, सपा और बसपा नेताओं को टिकट देने से परहेज नहीं है।
पिछले नौ साल से सत्ता का वनवास भोग रही भाजपा अगले माह से उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। पार्टी अपने लगभग सभी दिग्गजों को चुनावी महाभारत में उतारेगी। सिर्फ उन्हीं बड़े नेताओं को चुनाव लड़ने से दूर रखा जाएगा जो चुनाव प्रबंधन से जुड़े हैं।
सूत्रों के अनुसार बिहार में भाजपा में सेंध लगा रहे जद-यू को लोकसभा चुनाव में इसका करारा जवाब देने की योजना है।
भाजपा बिहार में जद-यू के उन विधायकों को लोकसभा चुनाव में टिकट देने पर विचार कर रही है जो चुनाव जीतने की स्थिति में हैं। गौरतलब है कि जद-यू ने साफ कर दिया है कि वह विधायकों को टिकट नहीं देगा।