यूपी के अमरोहा में राजनीति ने छुटभैया को अकूत संपत्ति का मालिक बना दिया। जिन्हें कल साइकिल भी नसीब नहीं थी, आज वे आलीशान कारों और बंगलों के मालिक हैं। सफेदपोश धंधा ऐसा फला कि उनकी संपत्ति के बारे में पूछने की न तो किसी के पास हिम्मत है और न ही जुर्रत।
सिर्फ लेखपाल, पुलिस कांस्टेबिल, दरोगा, शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कलेक्ट्रेट के कर्मचारी और निबंधन दफ्तर के अधिकारी कर्मचारी ही क्यों? इनके अलावा जिले के सफेदपोश भी अपनी ब्लैक मनी को प्रापर्टी के कारोबार में करोड़ों और अरबों की ब्लैक मनी को खपा रहे हैं। ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने में सबसे आगे जिले के सफेदपोश खड़े हैं। विवादित संपत्ति को खरीदने में वे सबसे आगे हैं।
अधिकारियों से साठगांठ हो या फिर कमजोर पक्ष को डराना धमकाना, सब कुछ नेता जी के लिए सरल है। पांच साल पहले तक पैदल घूमने वाले कई नेता अब अरबों की संपत्ति के मालिक हैं। जिसका हिसाब किताब न तो प्रशासन के पास है और न ही संबंधित विभाग के पास।
पुलिस और प्रशासन की साठगांठ से चला रहा धंधा
बेरोजगारी का दंश झेल रहे तमाम युवाओं को राजनीति में कैरियर नजर आ रहा है। कुछ बने या न बने, लेकिन अमीर बनने का फंडा सफेदपोश कारोबार में छिपा है। सत्ता आते ही पुलिस-प्रशासनिक अमले से साठगांठ के चलते तमाम हर तरह के धंधे से ब्लैक मनी की बारिश होने लगती है। खुद को कमाई करते हीं हैं, अपने साथ पुलिस-प्रशासनिक अमले को भी कमाई कराते हैं।
कुछ वर्षों में छुटभैया भी हो गए मालामाल
कई राजनैतिक पार्टियों से जुड़े तमाम छुटभैया आज मालामाल हैं। प्रापर्टी से लेकर डराने धमकाने तक के धंधे में लिप्त हैं। कई तरह के काले धंधे भी चल रहे हैं। सिर्फ प्रॉपर्टी ही क्यों, अवैध शराब से लेकर दूसरे गैर कानूनी काम करके भी छुटभैया आज मालामाल हो चुके हैं और कल विधायक या सांसद का चुनाव लड़ने का सपना देख रहे हैं। वहीं, कुछ पत्रकार भी जमीन के धंधे में शामिल होकर पेशे को बदनाम कर रहे हैं।
जिलेभर के कई तालाबों का अस्तित्व समाप्त किया
जिलेभर के तमाम तालाब समाप्त हो चुके हैं। उनपर आज बस्तियों का निर्माण हो चुका है। तहसील के कर्मचारियों की साठगांठ के बाद तालाबों को खसरा खतौनियों में कृषि भूमि दर्शा कर कब्जे करा दिए गए और इस खेल में मामूली नहीं, बल्कि सफेदपोश लोगों का सीधा हाथ रहा। यह जगजाहिर है, लेकिन विरोध करने की किसी में हिम्मत नहीं की।
एसडीएम प्रेमप्रकाश का कहना है कि तालाबों पर कब्जे के मामले में समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है। अगर कोई मामला संज्ञान में आएगा तो कार्रवाई की जाएगी।