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आडवाणी का आठ साल में तीसरी बार इस्तीफा

Tue, 11 Jun 2013 02:00 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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भाजपा के ‘लौह पुरूष’ लालकृष्ण आडवाणी का अपने पदों से इस्तीफा दिए जाने का यह पहला मौका नहीं है। पिछले आठ साल में पार्टी के शीर्ष पदों से त्यागपत्र दिए जाने का यह तीसरा अवसर है।
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इसमें पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की सराहना किए जाने के बाद उठे विवाद का मामला भी शामिल है।

85 वर्षीय आडवाणी भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उन्होंने पहली बार 7 जून 2005 में आरएसएस द्वारा खुद की आलोचना किए जाने के चलते भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था।

पाकिस्तान की छह दिवसीय यात्रा के दौरान जिन्ना को सेक्युलर नेता कहे जाने की वजह से आडवाणी आरएसएस और अन्य हिंदूवादी संगठनों के निशाने पर आ गए थे।

आडवाणी के जिन्ना के संदर्भ में दिए गए बयान को खुद को कट्टर हिंदुत्ववादी छवि से बाहर निकलने और अधिक उदारवादी दिखाने की कोशिश माना गया था। हालांकि चार दिन तक चले घटनाक्रम के बाद पार्टी नेताओं के आग्रह के चलते आडवाणी ने भाजपा अध्यक्ष पद से दिए इस्तीफे को वापस ले लिया था।
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जिन्ना प्रकरण के बाद से अब तक आडवाणी और संघ के रिश्ते दोबारा सामान्य नहीं हो पाए। इस्तीफा वापस लेने के सात महीने से भी कम वक्त में 31 दिसंबर 2005 को आडवाणी ने पार्टी अध्यक्ष छोड़ दिया।

उनकी जगह पर राजनाथ सिंह को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया था। जिन्ना प्रकरण के समाधान के लिए जून में भाजपा संसदीय बोर्ड और केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था।

बैठक में एक पेज का संकल्प स्वीकार किया गया था, जिसमें जिन्ना को देश विभाजन और इसके बाद भड़की हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। इस बैठक में आडवाणी भी शामिल थे।

अक्तूबर 2004 में पार्टी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए आडवाणी त्यागपत्र भेजने के बाद भी अपने बयान पर कायम रहे। भाजपा अध्यक्ष के रूप में आडवाणी का यह तीसरा कार्यकाल था।

आडवाणी ने दूसरी बार अपने इस्तीफे की घोषणा मुंबई में आयोजित भाजपा के सिल्वर जुबली राष्ट्रीय परिषद के एक दिन बाद प्रेस कांफ्रेंस में की थी। हालांकि उन्होंने संघ के दबाव में मजबूरन इस्तीफा दिए जाने से इंकार किया था।
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