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अटल की वजह से नर्वस रहते थे लालकृष्ण आडवाणी

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महज दो सीटों से भारतीय जनता पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने वाली अटल-आडवाणी की जोड़ी ने देश को कांग्रेस के इतर दूसरा राजनीतिक विकल्प दिया था। अटल अपनी भाषण शैली के लिए मशहूर थे तो आडवाणी अपनी सांगठनिक क्षमता के लिए जाने जाते थे। हालांकि आडवाणी खुद एक अच्छे वक्ता है, लेकिन उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि वो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण देने की अद्भुत कला के कारण हीन भावना से ग्रस्त रहा करते थे।
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भारत सरकार ने आज अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देकर सम्मानित किया। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले आडवाणी ने अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर एक अहम खुलासा किया था। इस खुलासे में उन्होंने बताया था कि वो अक्सर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण कला के कारण हीन भावना से ग्रसित रहा करते थे।
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पहले भाषण देने से शर्माते थे आडवाणी

आडवाणी ने खुलासा किया था, ‘‘मैंने वाजपेयी जी से कहा था कि 1970 के दशक में मैं हीन भावना से ग्रस्त हो गया था क्योंकि वो (वाजपेयी) बहुत अच्छा भाषण देते थे। सुषमा स्वराज भाषण देती है तो भी मुझे वैसा ही लगता है। मैं सच कह रहा हूं।’’ आडवाणी का कहना था कि साठ के दशक तक वो सार्वजनकि रुप से भाषण देने में शर्माते थे और बड़ी भीड़ को संबोधित करने से कतराते रहते थे।

साल 1968 में वाजपेयी जनसंघ के अध्यक्ष बने जिसके कुछ वर्षों बाद वो यह पद आडवाणी को देना चाहते थे। जनसंघ ही आपातकाल के बाद भारतीय जनता पार्टी हो गई। आडवाणी ने बताया, ‘‘मैं अध्यक्ष नहीं बनना चाहता था क्योंकि मैं सार्वजनिक भाषण देना नहीं चाहता था। मैंने सुझाव दिया कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया को अध्यक्ष बना दिया जाए।’’

हालांकि बाद में विजयाराजे सिंधिया ने पद लेने से इंकार कर दिया और कुछ अन्य नेता भी पद संभाल नहीं पाए तो आखिरकार आडवाणी को ही अध्यक्ष बनना पडा। हालांकि आडवाणी का कहना था कि वो धीरे धीरे भाषण देने की कला सीख पाए। उनका कहना था, ‘‘ मैं तो अटल जी से बहुत प्रभावित था. मुझे लगता था कि अगर राजनेता इतना अच्छा बोल रहे हैं तो मैं तो कभी नेता ही नहीं बन सकूंगा।’’
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