लोक जनशक्ति पार्टी के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सर्राफ ने इस बात से इनकार किया है कि वह भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के दूत के रूप में हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी से मिले थे।
संजय ने कहा कि गिलानी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध हैं। उनसे पहले भी मिलते रहे हैं। संजय ने कहा कि जब उनकी मां का निधन हुआ था तो गिलानी श्रीनगर से विशेष तौर पर आए थे।
'हालचाल लेने गया था गिलानी के पास'
चूंकि गिलानी का स्वास्थ्य खराब था तो वे उनका हालचाल लेने के लिए अस्पताल गए थे। मोदी के दूत के रूप में किसी तरह की बातचीत करने नहीं गए थे।
मालूम हो कि गिलानी ने पिछले दिनों दावा किया था कि जब वे बीमार थे तो दिल्ली में मोदी ने अपने दो दूत उनके पास भेजे थे और सरकार बनने के बाद कश्मीर समस्या का हल निकालने का वादा किया था।
'मोदी का संदेश लेकर नहीं गया था'
गिलानी से मिलने वाले दो लोगों में संजय सर्राफ और पूर्व विधायक एमएल मट्टू के नाम की चर्चा रही। मट्टू से संपर्क नहीं हो सका है। संजय ने कहा कि वह चुनाव के संबंध में बिहार के दौरे पर थे।
लेकिन जब उन्होंने इस बारे में सुना तो लौट आए हैं। हालांकि गिलानी ने उनसे मिलने वाले दूतों के नाम हालांकि अब तक उजागर नहीं किए थे। यह मुलाकात 22 मार्च को हुई थी।
अन्य अलगाववादी नेताओं से भी मिले!
गिलानी ने यह दावा भी किया था कि मोदी के दोनों दूतों ने अन्य अलगाववादी नेताओं से भी मुलाकात की थी।
मालूम हो कि गिलानी और कथित मोदी दूतों की मुलाकात की रिपोर्टों के मीडिया में आने के बाद विरोधी दलों ने भाजपा पर निशाना साधा है और साथ ही सफाई भी मांगी है।