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सियाचिन के हीरो को कैसे मिला हनुमंथप्पा नाम?

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सियाचिन ग्लेशियर में हिमस्खलन के बाद छह दिनों तक बर्फ में दबे रहे लांस नायक हनुमंथप्पा बचपन से ही संघर्षशील और दृढ़ संकल्प लेने वाले शख्स थे। इसी कारण हनुमान के नाम पर उनका नाम हनुमंथप्पा रखा गया था।
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कर्नाटक निवासी हनुमंथप्पा पढ़ने के लिए रोजाना छह किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे। पढ़ाई के साथ-साथ बचपन से उन्हें दौड़ने भागने का शौक रहा था।

दरअसल बचपन में ही उन्होंने अपना लक्ष्य सेना में जाने के लिए निर्धारित कर लिया था। यह बात उनके भाई ने कर्नाटक के मीडिया कर्मियों से कही थी। हनुमंथप्पा ने कई प्रयास सेना में भर्ती होने के लिए कई प्रयास किए, और अंतत: चौथे प्रयास में सफल हो गए। लेकिन पहले तीन प्रयासों में विफल रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार भर्ती होकर ही दम लिया।
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छुट्टियों में कहा था घर आने को

उनके परिजनों का कहना है कि गांव के कई युवक सेना में भर्ती होने जाते थे, जिसने से प्रेरित होकर वह सेना में भर्ती हुए थे। बृहस्पतिवार को जांबाज हनुमंथप्पा ने दुनिया को अलविदा तो कह दिया, लेकिन उनकी वीरता, साहस और मधुर व्यवहार लोगों के जहन में हमेशा बसा रहेगा।

उनके दोस्तों, रिश्तेदारों, परिजनों और सहकर्मियों का कहना है कि हनुमंथप्पा सख्त होने के साथ ही बेहद मृदुभाषी थे। इस जांबाज को उनके साथी योग विशेषज्ञ के रूप में याद करते हैं। उन्होंने हिमस्खलन से ठीक एक दिन पहले अपने परिजनों से बात की थी और छुट्टियों में घर आने को कहा था।
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