सियाचिन ग्लेशियर में हिमस्खलन के बाद छह दिनों तक बर्फ में दबे रहे लांस नायक हनुमंथप्पा बचपन से ही संघर्षशील और दृढ़ संकल्प लेने वाले शख्स थे। इसी कारण हनुमान के नाम पर उनका नाम हनुमंथप्पा रखा गया था।
कर्नाटक निवासी हनुमंथप्पा पढ़ने के लिए रोजाना छह किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे। पढ़ाई के साथ-साथ बचपन से उन्हें दौड़ने भागने का शौक रहा था।
दरअसल बचपन में ही उन्होंने अपना लक्ष्य सेना में जाने के लिए निर्धारित कर लिया था। यह बात उनके भाई ने कर्नाटक के मीडिया कर्मियों से कही थी। हनुमंथप्पा ने कई प्रयास सेना में भर्ती होने के लिए कई प्रयास किए, और अंतत: चौथे प्रयास में सफल हो गए। लेकिन पहले तीन प्रयासों में विफल रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार भर्ती होकर ही दम लिया।