फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CM तक पहुंचा 50 करोड़ के लेखपाल का मामला

Sat, 08 Nov 2014 01:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर के खादर में भूमि घोटाला उजागर होने का मामला सीएम दरबार तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने डीएम कौशलराज शर्मा से फोन पर पूरे मामले की जानकारी ली और निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम ने भूमाफिया के खिलाफ सख्ती बरतने के लिए भी कहा।
विज्ञापन

 
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष जयभगवान और संरक्षक शिवकुमार गोयल के खिलाफ जिला प्रशासन की कार्रवाई का मामला शासन तक पहुंच गया है। प्रदेश सरकार के एक मंत्री लेखपालों के समर्थन में लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं। मंत्री ने कुछ नेताओं के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की और प्रशासन की कार्रवाई को गलत करार देते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की। इसी बीच जिलाध्यक्ष सतेंद्र सैनी ने मुख्यमंत्री कार्यालय को फैक्स कर पूरे मामले की जानकारी दी। जिलाध्यक्ष ने प्रशासन की भूमाफिया के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को निष्पक्ष बताया।

सतेंद्र सैनी का कहना था कि जमीन को माफिया से कब्जामुक्त कराकर गरीब भूमिहीनों को दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फोन पर डीएम कौशलराज शर्मा से पूरे मामले की जानकारी ली। डीएम ने मुख्यमंत्री को तथ्यात्मक जानकारी देते हुए वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष और न्यायपूर्ण कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सीएम ने यह भी कहा कि भूमाफिया से साठगांठ रखने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई रियायत न बरती जाए। उधर, कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने भी डीएम और सपा जिलाध्यक्ष से बात कर मामले की जानकारी ली। डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि लेखपालों की गिरफ्तारी के निर्देश पुलिस को दिए हैं। दोनों लेखपाल फरार हैं।
विज्ञापन


लेखपाल जयभगवान के खिलाफ संभवत: शनिवार को निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। अकूत संपत्ति पाए जाने पर डीएम ने कहा कि लेखपालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं कि उन्होंने यह संपत्ति खरीदने से पहले परमीशन ली या नहीं। साथ ही इन्कमटैक्स विभाग को भी सूचित किया जा रहा है। साथ ही अवैध तरीके से जुटाई गई संपत्ति को कुर्क किए जाने की कार्रवाई भी की जाएगी।

दोषी अधिकारी भी होंगे चिन्हित
लेखपालों ने अकेले अपने दम पर करोड़ों की संपत्ति कैसे खड़ी दी, इस पर भी मंथन चल रहा है। माना जा रहा है कि कुछ अधिकारियों भी मिलीभगत रही होगी। 1986 से हस्तिनापुर अभ्यारण्य घोषित होने के बाद भी बैकडेट में पट्टे आवंटित किए गए। साथ ही बैराज पुल पर काम करने वाले बाहरी मजदूरों को भी गांवों का निवासी दिखाकर पट्टे काटे गए और फिर लेखपालों ने कब्जा कर लिया। डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि लेखपाल शिवकुमार ने नौकरी का अधिकांश समय खादर के शुक्रताल सर्किल में बिताए। इस दौरान लेखपाल का ट्रांसफर क्यों नहीं हुआ? यह भी जांच के दायरे में है। डीएम ने बताया कि मामले में लिप्त अधिकारियों की भी छानबीन की जा रही है। पट्टा आवंटन में किस स्तर पर किस अधिकारी की गलती रही, यह भी जांच की जा रही है।
विज्ञापन

अब कोर्ट से राहत पाने की दरकार

शासन-प्रशासन से कोई मदद नहीं मिलने पर लेखपाल अब कोर्ट से राहत पाने की फिराक में जुट गए हैं। लेखपाल जयभगवान गिरफ्तारी पर स्टे लेने की तैयारी में है। डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि प्रकरण से संबंधित पत्रावलियां तैयार कराई जा रही हैं। आरोपियों को गलत तथ्यों के आधार पर किसी तरह की राहत न मिले, इसके लिए न्यायिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

ईमानदारी से काम होता तो कोई भूमिहीन नहीं रहता
खादर में लेखपालों की भूमाफियाओं से मिलीभगत की वजह से गरीबों का हक मारा गया। प्रशासन ने माना है कि वर्तमान में डेढ़ लाख बीघा भूमि पर माफियाओं का अवैध कब्जा है। यह बात दीगर है कि जमीन अगर ईमानदारी से बांटी जाती तो शायद क्षेत्र का कोई व्यक्ति भूमिहीन नहीं बचता।

गंगा खादर के जिन गांवों में सरकारी जमीन का बंदरबांट हुआ, वहां अधिकतर दलित और अतिपिछड़ी जातियों के लोग रहते हैं। एडीएम एफ रामकिशन शर्मा ने बताया कि लेखपाल शिवकुमार और जयभगवान को यह जानकारी थी कि इन गांवों में उनके खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। किसी ने आवाज उठाने की कोशिश की तो उसके खिलाफ झूठे मुकदमे कराकर जेल भिजवा दिया। इन गांवों में दोनों लेखपालों और इनके परिजनों का दबदबा था।

गंगा खादर की लगभग डेढ़ लाख बीघा भूमि ऐसी है, जिस पर माफियाओं का कब्जा है। एडीएम यह भी मानते हैं कि अगर यह जमीन भूमिहीनों में वितरित की जाती तो क्षेत्र का कोई परिवार बिना जमीन के नहीं रहता। भूमाफियाओं के खिलाफ 19 साल से जिला कचहरी में धरने पर बैठे मास्टर विजय सिंह लगातार यह मांग उठाते रहे हैं कि माफियाओं के कब्जे से भूमि मुक्त कराकर भूमिहीनों को वितरित की जाए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें