यूपी में लोकसभा चुनाव के पहले चरण की बिसात सज गई है। पहले चरण में सहानपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर और अलीगढ़ में योद्धा शह-मात के लिए गोटें बिछाने में जुट गए हैं।
मतदाताओं के दिल में कौन कितना जगह बना सका इसका फैसला 10 अप्रैल को होगा। बहरहाल इन दस सीटों में मौजूदा समय पांच पर बसपा, दो पर सपा तो एक पर रालोद का कब्जा है।
रालोद मुखिया अजित सिंह, पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह, फिल्म अभिनेता राज बब्बर और अभिनेत्री नगमा की लोकप्रियता की भी परख इसी चरण में होगी। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद हो रहे यहां के चुनाव पर सभी की नजरें टिकी हैं।
गाजियाबाद से उम्मीदवार
थलसेना अध्यक्ष रहे जनरल वीके सिंह पहले अन्ना के साथ थे और अब भाजपा की और से गाजियाबाद से उम्मीदवार हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ इसी सीट से मौजूदा सांसद हैं तो वहीं, बसपा से मुकुल उपाध्याय पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई और मौजूदा एमएलसी हैं। पहली बार संसदीय चुनाव के लिए मैदान में हैं।
सपा से सुधन रावत पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे हैं। विधान परिषद का पिछला चुनाव रालोद से लड़े और हार गए थे। फिर सपा में शामिल हो गए। इनके भाई राम नरेश रावत भाजपा से विधायक रहे हैं। फिल्म अभिनेता राज बब्बर फीरोजाबाद से उपचुनाव जीते थे। इसके पहले आगरा से सांसद थे। पहले सपा में थे। आजकल कांग्रेस में हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता की भी भूमिका निभाते हैं।
आम आदमी पार्टी की शाजिया इल्मी दिल्ली विधानसभा चुनाव में आरकेपुरम सीट से बहुत कम वोटों से हार गई थीं। अब आप ने लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा है। इनके अलावा, बहुजन मुक्ति पार्टी से नरेश गौतम, भारतीय सर्वोदय क्रांति पार्टी से सुरेश पाल, निर्दलीय प्रत्याशियों में नितिन, रामफल शाक्य, रिंकू कुमार त्यागी, विनोद कुमार त्यागी, सलीम मलिक, साबिर, केशव चौधरी और संजीव कुमार।
सहारनपुर से ये लगाए हैं आस
राघव लखनपाल सहारनपुर से विधायक हैं। पिता निर्भयपाल शर्मा कांग्रेस के प्रमुख और विधायक थे। पिता की हत्या के बाद राजनीति में सक्रिय। कांग्रेस से इमरान मसूद हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद के भतीजे। सपा ने टिकट काटा तो कांग्रेस में आ गए। बसपा के जगदीश राणासे मौजूदा सांसद हैं। बसपा ने इन्हें दूसरी बार मैदान में उतारा है।
सपा से शाजान मसूद, पूर्व केंद्रीय मंत्री रसीद मसूद के बेटे हैं। सपा ने इमरान मसूद का टिकट काटकर उम्मीदवार बनाया। 'आप' ने योगेश दहिया को उतारा है। ये किसानों के मुद्दों पर मुखर रहे। गेल इंडिया और पावर कॉर्पोरेशन के खिलाफ किसानों को लड़ाई में आगे रहे। यहीं से पहचान भी मिली।
इन दिग्गजों के अलावा बहुजन मुक्ति पार्टी से डॉ. रतन सिंह, आदर्श राष्ट्रीय विकास पार्टी से राजेंद्र कुमार, राष्ट्रीय जनमोर्चा से शाहनवाज, अंबेडकर समाज पार्टी से शिवकुमार, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में फिरोज आफ ताब, रघुबीर सिंह बौद्ध, सीपी वर्मा,शेषराज सिंह और हंसराज सैनी।
बागपत के महारथी
अजित सिंह 7 बार के सांसद और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष की यह परंपरागत सीट है। वे केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री भी हैं। सत्यपाल सिंह मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे हैं। वीआरएस लेकर भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे हैं।
सोमेंद्र ढाका बागपत में एडवोकेट हैं। शुरू से अन्ना आंदोलन से जुड़े रहे। फिर केजरीवाल के साथ आ गए। आप के टिकट पर इनका पहला चुनाव है।
बसपा के प्रशांत चौधरी विधान परिषद सदस्य हैं। पहली बार सांसदी के चुनाव में उतरे हैं। पत्नी हेमलता बागपत से विधायक हैं। सपा से गुलाम मोहम्मद पहली बार सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। शिवालका क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए थे।
बुलंदशहर (सु.) की उम्मीदवारी
सपा के टिकट पर लड़ रहे कमलेश बाल्मीकि मौजूदा सांसद हैं। पिछली बार भाजपा नेता कल्याण सिंह सपा का समर्थन कर रहे थे तो टिकट दिलाया था। इस बार भी सपा से मैदान में हैं । भाजपा ने डॉ. भोला सिंह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के नजदीकी को उतारा है। पहली बार लोकसभा प्रत्याशी हैं। प्रदीप जाटव बसपा के कोआर्डिनेटर और पुराने नेता हैं।
लोकसभा चुनाव के लिए पहली बार मैदान में हैं। रालोद से अंजू मुस्कान दलित हैं। मुस्लिम से शादी की थी। पहली बार चुनाव मैदान में हैं।
आप उम्मीदवार डॉ. राहुल दीपांकर मूल रूप से बुलंदशहर के ऊंचागांव निवासी डॉ. राहुल दीपांकर अरविंद केजरीवाल आंदोलन से प्रभावित हो राजनीति में कूदे। मैदान में बहुजन मुक्ति पार्टी से नरेश गौतम, भारतीय सर्वोदय क्रांति पार्टी से सुरेश पाल, निर्दलीय प्रत्याशियों में नितिन, रामफल शाक्य, रिंकू कुमार त्यागी, विनोद कुमार त्यागी, सलीम मलिक, साबिर, केशव चौधरी और संजीव कुमार भी हैं।
अलीगढ़ से इनकी है उम्मीदें
जफर आलमसपा के मौजूदा विधायक हैं। पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे हैं। मौजूदा सांसद राजकुमारी सिंह के बेटे अरविंद कुमार सिंह बसपा के टिकट पर मां की सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पिता ठाकुर जयवीर सिंह विधायक व मंत्री रहे हैं।
बिजेंद्र सिंह पूर्व सांसद हैं। लोकसभा का पिछला चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। कांग्रेस से एक बार फिर मैदान में हैं। सतीश गौतम कल्याण सिंह के नजदीकी हैं और भाजपा से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
आप से साबिर राही पहली बार राजनीति में आए हैं। कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट का कारोबार है। इनके अलावा सर्व समाज कल्याण पार्टी से अमिता सिंह जाट, लोकदल से देवानंद, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से दुर्गेश चंद्र गौतम, बहुजन मुक्ति पार्टी से प्रदीप कुमार, पीस पार्टी से बादशाह, राष्ट्रीय सवर्णदल से राकेश चंद्र रावत, राष्ट्रीय समाज पक्ष से विनोद कुमार बघेल, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नत्थीलाल शर्मा व संजय कुमार।
बिजनौर के उम्मीदवार
कुंवर भारतेन्द्र सिंह भाजपा के मौजूदा विधायक, पूर्व में मंत्री रहे हैं। मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपी हैं। इनके पिता कुंवर देवेंद्र सिंह भी तीन बार विधायक रहे हैं। मलूक नागर बसपा से लड़ रहे हैं। 2004 में लोकसभा चुनाव रालोद के टिकट पर हारे, 2009 का मेरठ से बसपा के टिकट पर हारे। भाई लखीराम नागर बसपा सरकार में राज्यमंत्री थे।
रालोद से जयाप्रदा रामपुर से दो बार सांसद रही हैं। इस बार रामपुर सीट और सपा छोड़कर रालोद में आईं। रालोद से पहली बार चुनाव मैदान में हैं।
शाहनवाज राणा 2007 में बिजनौर में बसपा के विधायक चुने गए। 2012 में रालोद के टिकट से हारे। अब साइकिल पर सवार हैं। इनके चाचा कादिर राणा मुजफ्फरनगर से बसपा के प्रत्याशी हैं। आप के डॉ. गौरव पेशे से चिकित्सक हैं।
दिल्ली में क्लीनिक चलाते हैं।चुनाव की बात की जाए तो पहली बार मैदान में हैं और राष्ट्रवादी समाज पार्टी से राज्यसभा सदस्य मोहम्मद अदीब, पीस पार्टी से मो. मूसा, ऑल इंडिया माइनॉरिटी फ्रंट से परवेज अकील, भारतीय मोमिन फ्रंट से उदयवीर, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कमल, उमेश उर्फ पाणि, गजरेश भी मैदान में हैं।
मुजफ्फरनगर से ये हैं उम्मीदवार
भाजपा के युवा नेता संजीव बालियान हैं। चुनाव मैदान में पहली बार उतर रहे हैं। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान वे काफी सक्रिय रहे। कादिर राणा मौजूदा सांसद हैं। सांसद बनने के लिए दूसरी बार मैदान में हैं। एक बार कांग्रेस से एमएलसी, एक बार रालोद से विधायक रह चुके हैं। पंकज अग्रवाल कांग्रेस से लोकसभा चुनाव में पहली बार उतरे हैं।
मुजफ्फरनगर पालिका के अध्यक्ष और बड़े उद्योगपति हैं। वीरेंद्र सिंह राष्ट्रीय लोकदल से कई बार विधायक रहे। प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने। इस बार समाजवादी पार्टी से चुनाव मैदान में है।
आप के टिकट पर पूर्व सैनिक यामीन चौधरी रतनपुरी थाना क्षेत्र के गांव टोडा के मूल निवासी हैं। यामीन जाट आरक्षण को लेकर सक्रिय रहे। इनके अलावा राधिका बालियान (तृणमूल कांग्रेस), ललित चौहान (जदयू), निर्दलीय प्रत्याशियों में राकेश कुमार, शबनम, शानदार गुफरान, मांगेराम, अमित, अंकुर कुमार, गुफरान, जगवीर सिंह, मोहम्मद यामीन, नसीम अंसारी, फूल सिंह पाल, चतर सिंह कश्यप।
गौतमबुद्धनगर के महारथी
पिछली बार भाजपा के टिकट पर महेश शर्मा नोएडा से चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। दूसरी बार वे फिर मैदान में हैं। बसपा के सतीश अवाना पहली बार चुनाव मैदान में हैं। बसपा ने मौजूदा सांसद सुरेंद्र नागर का टिकट काटकर इन्हें प्रत्याशी बनाया है।
नागर सपा में शामिल हो गए हैं। केपी सिंह गौतमबुद्धनगर में ही रियल एस्टेट कारोबार करते हैं और आप के टिकट से पहली बार चुनाव मैदान में हैं। गाजियाबाद से रमेश चंद्र तोमर तीन बार भाजपा के सांसद रहे। इस बार कांग्रेस से फिर मैदान में हैं।
सपा से उतरने वाले नरेंद्र सिंह भाटी पूर्व विधायक हैं। कैबिनेट मंत्री का दर्जा है। अन्य में राजपा से उदयवीर, इंडियन ओसनिक पार्टी से गजेंद्र, राष्ट्रीय धर्मनिरपेक्ष दल से धर्मेंद्र, बहुजन मुक्ति पार्टी से रामविलास, राक्रांपा से रविंद्र शर्मा, एनएलपी से रूवेज आलम राही, तृणमूल कांग्रेस से मो. साबिर अंसारी, एनबीडीपीसे एसपी सिंह, अभसकां से सोनिया शर्मा, राष्ट्रीय नौ जवान दल से सीमा, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कदीम, कदीर खां, ग्रीस कुमार, महेश, राकेश, सफरुद्दीन, सावित्री, सुनील गौतम और सुमिति।