सियासत के भी अजब खेल हैं। कवाल और मलिकपुरा भले ही खौफ और सन्नाटे से न उबर पाए हों, लेकिन सियासत अपना रंग बदल चुकी है। एक साल पहले हुई नंगला मंदौड़ पंचायतों में इंसाफ दिलाने का दंभ भरने वाले ज्यादातर नेताओं ने मृतकों की बरसी पर दो फूल चढ़ाना भी मुनासिब नहीं समझा।
मलिकपुरा में श्रद्धांजलि सभा का यह निजी कार्यक्रम था, लेकिन हलचल लखनऊ तक महसूस की गई। अनहोनी की आशंकाओं के बादल घिरे थे। इधर अफसरों की नींद उड़ी थी तो उधर सरकार का चैन। एडीजी एलओ मुकुल गोयल पल-पल पर नजर रखे हुए थे। प्रशासन का होमवर्क इतना जबरदस्त था कि कुछ भी होने की गुंजाइश नहीं थी। कुछ ‘बड़बोले’ नेताओं को पहले ही यह मैसेज दे दिया गया था कि अगर कुछ गलत हुआ तो जिम्मेदारी उनकी होगी।
यही वजह थी कि श्रद्धांजलि के बाद प्रस्तावित सभा भी नहीं हुई। भाषणबाजी का कोई मौका नहीं मिला। बात सियासत की करें तो कार्यक्रम से भाजपा और भाकियू को छोड़ दूसरे दलों ने किनारा ही किए रखा। एक साल पहले पंचायतों में इंसाफ दिलाने का दंभ भरने वाले कई बड़े नेता नदारद रहे।
पूरी टीम के साथ मलिकपुरा में डटे रहे केंद्रीय राज्यमंत्री
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान सुबह से ही अपनी पूरी टीम के साथ मलिकपुरा में डटे थे। बिजनौर सांसद भारतेंद्र भी दोपहर बाद कुछ देर के लिए आए। कवाल कांड के बाद नंगला मंदौड़ पंचायत में अग्रिम पंक्ति में रहने वाले सरधना विधायक संगीत सोम, सांसद हुकुम सिंह, अशोक कटारिया, स्वामी ओमवेश, पूर्व विधायक राजपाल बालियान, चंद्रपाल फौजी, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरकिशन मलिक, थांबेदार सीताराम बहावड़ी आदि का कार्यक्रम में नहीं पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा।
इन सभी नेताओं के खिलाफ धारा 144 का उल्लंघन या भड़काऊ भाषण देने के आरोप में कार्रवाई की गई थी। हालांकि भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के आयोजक पूर्व ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि कार्यक्रम में अलग से किसी को बुलावा नहीं भेजा गया, जो भी लोग शामिल हुए अपनी स्वेच्छा से आए। यह दुख व्यक्त करने का मौका था, इसमें राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं थी। जो लोग नहीं आए, उन्हें अवश्य कोई जरूरी काम रहा होगा।
रालोद ने किया किनारा
दंगों के बाद से बुरी तरह बिखरी रालोद ने मलिकपुरा के श्रद्धांजलि कार्यक्रम से पूरी तरह किनारा किए रखा। एक साल पहले बढ़-चढ़कर पंचायतों में शामिल होने वाले रालोद नेताओं ने कार्यक्रम में पहुंचना जरूरी नहीं पहुंचा। जिलाध्यक्ष अजीत राठी भी नजर नहीं आए। सपा और बसपा नेताओं ने भी कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी।
मलिकपुरा में गौरव-सचिन को श्रद्धासुमन अर्पित
कवाल कांड में मारे गए गौरव और उसके ममेरे भाई सचिन की पहली पुण्यतिथि पर आयोजित हवन में सैकड़ों लोगों ने आहुति दी। हालांकि सचिन की पत्नी स्वाति श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नहीं पहुंची। उधर, कवाल में भी शाहनवाज की कब्र पर फातिहा और नमाज के बाद मस्जिद में दुआएं की गईं। कड़ी सुरक्षा के बीच शांति से दिन गुजरा तो प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। इस दौरान खुफिया विभाग अलर्ट रहा।
गुरुवार को जानसठ के मलिकपुरा में श्रद्धांजलि कार्यक्रम को लेकर कवाल गेट से लेकर मलिकपुरा तक पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। सुबह करीब आठ बजे से ही लोग यहां पहुंचने लगे थे। आर्य समाज चित्तौड़ा के ब्रह्मचारियों ने हवन किया। मृतक आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई। लोगों ने दोनों के चित्रों पर पुष्प अर्पित किए। तमाम आला अफसर हालात पर कड़ी नजर रखे रहे। उधर, कवाल स्थित कब्रिस्तान में शाहनवाज कुरैशी की कब्र पर फातिहा पढ़ा गया। मृतक के पिता सलीम के अलावा सलमान सईद समेत गांव के लोग सुबह करीब 10 बजे शाहनवाज की कब्र पर पहुंचे। दोपहर बाद मस्जिद में नमाज अदा की गई। मुस्लिम समाज के लोगों ने दुआएं कीं।
मलिकपुरा नहीं गई स्वाति
सचिन की पत्नी स्वाति श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नहीं पहुंची। वह मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिलने के बाद अपने मायके पुरबालियान में रह रही है। ससुर बिशन सिंह के परिवार को उम्मीद थी कि स्वाति जरूर आएगी। सचिन का बेटा गगन अपने मामा धनसेठ के साथ मलिकपुरा पहुंचा, लेकिन कुछ घंटे बाद ही वह भी लौट गया।
ये पहुंचे कार्यक्रम में
कार्यक्रम में गौरव के पिता रविंद्र सिंह और सचिन के पिता बिशन सिंह के परिवार के अलावा केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान, भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, भाजपा विधायक सुरेश राणा, नूरपुर विधायक लोकेंद्र सिंह, पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल, युवा जाट महासभा के प्रदेश अध्यक्ष धर्मवीर बालियान, पूर्व मंत्री सुधीर बालियान, साध्वी प्राची आर्या आदि पहुंचे।
बंदूकों के साए में रहा कवाल
मलिकपुरा में मनाई गई सचिन-गौरव की पुण्यतिथि के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए। कवाल को छावनी में तब्दील कर दिया गया। गलियों को भी अस्थायी चेनर लगाकर पूरी तरह बंद किया गया था। कदम-कदम पर आरएएफ, पीएसी और पुलिसबल के जवान मौजूद रहे। मलिकपुरा और बाईपास पर भी कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।
कवाल गांव में एक साल पूर्व मारे गए सचिन-गौरव की पुण्यतिथि को लेकर कुछ दिन से पंचायतों के माध्यम से की जा रही बयानबाजी के चलते क्षेत्र में तनाव की स्थिति थी। इसके चलते गुरुवार को हुए कार्यक्रम के लिए कवाल और मलिकपुरा में पुलिस-प्रशासन द्वारा कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए। कवाल की तो पूरी तरह से किलेबंदी कर दी गई। हर चौराहे, गली और नुक्कड़ पर पीएसी और पुलिस के जवान तैनात रहे।
मुख्य मार्ग से जुड़ी गांव की सभी गलियों को अस्थायी चेनर लगाकर बंद कर दिया गया था। इन गलियों से किसी को भी मुख्य मार्ग पर आने नहीं दिया गया। गांव के मेन गेट पर आरएएफ के साथ एसपी क्राइम राकेश कुमार जौली, एडीएम प्रशासन डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी मोर्चा संभाले हुए थे। सीओ जानसठ मुकेशचंद मिश्र पूरे क्षेत्र में लगातार गश्त कर रहे थे। जानसठ से सिखेड़ा नहर पुल तक छह स्थानों पर चेक प्वाइंट बनाए गए थे। मलिकपुरा के साथ ही बाईपास पर भी काफी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिसके चलते पूरा कार्यक्रम निर्विघ्न ढंग से संपन्न हो गया। एसपी क्राइम राकेश कुमार जौली ने बताया कि स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरे कार्यक्रम को सकुशल संपन्न करा दिया गया है।
किसने क्या कहा?
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराध बेकाबू हैं। छेड़छाड़ की घटनाएं रोजाना हो रही हैं। बीते एक साल में पुलिस-प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा। हालात जस के तस बने हुए हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार को और अधिक गंभीरता दिखानी होगी। एकपक्षीय कार्रवाई से हालात बिगड़ते हैं। वोट की राजनीति से ऊपर उठकर सही कार्रवाई करनी चाहिए। वेस्ट यूपी में जिस तरह अपराध में बढ़ोत्तरी हुई है, उससे यहां प्रत्येक वर्ग अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहा है।
न्याय की बात करे सरकार : टिकैत
भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार को न्याय की बात करनी होगी। पीड़ित की बिरादरी नहीं देखी जानी चाहिए। प्रत्येक घटना को सांप्रदायिकता का रंग देने वालों पर पुलिस कड़ी कार्रवाई करें। एक वर्ग विशेष को पुलिस-प्रशासन कई घटनाओं में एकतरफा सहयोग करता दिखा। विरोध किया गया तो इसे ही मुद्दा बनाने की कोशिशें की गई। सही बात पर भी मुंह खोलते हुए सौ बार सोचना पड़ता है। ऐसा लगा रहा है कि हम अब भी गुलाम भारत में रह रहे हैं। दंगा जिले के लिए दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। दोनों समुदाय भाईचारे के साथ रहें और पीड़ितों को इंसाफ मिलना चाहिए।
दंगाइयों के साथ सपा सरकार: राणा
थानाभवन के भाजपा विधायक ठाकुर सुरेश राणा ने कहा कि सपा सरकार दंगाइयों का साथ दे रही है। सहारनपुर की घटना इसका ताजा उदाहरण है। दंगे के सबसे बडे़ गुनहगार के साथ मुख्यमंत्री के फोटो सारी हकीकत बयान कर रहे हैं। बहन-बेटियों के साथ आए दिन छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं। पुलिस-प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहा है। लोकसभा चुनाव में जनता ने सपा को आइना दिखा दिया। यूपी में भाजपा की सरकार बनेगी तो सुशासन का सपना भी साकार हो जाएगा। जनता अब सपा सरकार के झूठ में फंसने वाली नहीं है।
आजम खां का नार्को टेस्ट कराएं : साध्वी
साध्वी प्राची आर्य ने कहा कि यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां दंगों के सबसे बड़े गुनहगार हैं। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत और शामली समेत सारे वेस्ट यूपी की घटनाओं में कहीं न कहीं उनकी भूमिका रही है। कवाल कांड के बाद पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों को आजम खां ने ही थाने से छुड़वाया था। उनका नार्को टेस्ट कराया जाए, तो सारी हकीकत सामने आ जाएगी। बहू-बेटी के सम्मान की लड़ाई लड़ने वालों पर उलटी कार्रवाई की जाती है। भाजपा इंसाफ की लड़ाई में हमेशा की तरह आगे रहेगी।