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लश्कर ने ली हैदराबाद ब्लास्ट की जिम्मेदारी

Mon, 25 Feb 2013 09:59 AM IST
हैदराबाद/एजेंसी
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हैदराबाद के दिलसुखनगर में हुए दोहरे विस्फोटों को पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा ने अंजाम दिया था। आंध्र प्रदेश भाजपा प्रमुख जी.किशन रेड्डी ने रविवार को मीडिया में यह कह कर सरगर्मी पैदा की कि उन्हें पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा का पत्र मिला है, जिसमें उसने इन विस्फोटों की जिम्मेदारी ली है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेड्डी ने दावा किया कि शनिवार को डाक से उन्हें यह पत्र मिला, जो उर्दू और अंग्रेजी में लिखा है। उन्होंने मीडिया को तो पत्र दिखाने से इंकार किया और कहा कि एबिड्स पुलिस स्टेशन को इसे सौंप चुके हैं।

रेड्डी के अनुसार लश्कर ने पत्र में लिखा है कि हैदराबाद का बेगम बाजार अगला निशाना होगा। उल्लेखनीय है कि बेगम बाजार भी यहां का भीड़भाड़ वाला इलाका है। एबिड्स पुलिस ने इस बात की पुष्टि की किशन रेड्डी ने उन्हें पत्र सौंपा है, जिसकी जांच चल रही है।
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इस बीच प्रधानमंत्री रविवार को विस्फोट स्थलों और अस्पतालों में पहुंचे। राज्य में कुल तीन घंटे की यात्रा में घटना स्थल पर वे 10 मिनट और घायलों के पास 40 मिनट तक रुके। उन्होंने घायलों से मुलाकात में विश्वास दिलाया कि सरकार उनके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। उन्होंने शहर के लोगों से उत्तेजित न होने और एकता बनाए रखने की अपील की।

मनमोहन सिंह ने कहा, ‘मैं हैदराबाद में आप लोगों का दुख बांटने आया हूं। जिन परिवारों में शोक हुआ मैं उनके प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।’

पीएम वायुसेना के विशेष विमान से आए और उसी से लौटे। जाने से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री एन किरन कुमार रेड्डी से मुलाकात की। राज्य के पुलिस महानिदेशक वी दिनेश रेड्डी ने पीएम को जांच की जानकारी दी।

उन्होंने पीएम से कहा कि सीसीटीवी की मदद से कुछ ‘स्पष्ट सबूत’ पुलिस को मिले हैं। साथ ही जेल में बंद कुछ आतंक के संदिग्धों से भी पूछताछ की जा रही है। डीजीपी ने प्रधानमंत्री को विश्वास दिलाया कि वे जल्दी ही इस मामले की तह तक पहुंच जाएंगे। वे तीस से ज्यादा लोगों से इस मामले में पूछताछ कर चुके हैं।

इस बीच सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने 2007 के दोहरे बम विस्फोट कांड के संबंध में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति मोहम्मद रईसुद्दीन को फिर से पूछताछ के लिए रख लिया है। पुलिस आयुक्त अनुराग शर्मा के अनुसार अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है।

पुलिस भारी दबाव में
तीन दिन में कोई सफलता न मिलने के बाद हैदराबाद पुलिस बेहद दबाव में है। अब तक की नाकामी के बीच माना जा रहा है कि विस्फोटों का षड्यंत्र आंध्र प्रदेश से बाहर रचा गया। लेकिन पुलिस का कहना है कि स्थानीय मदद के बिना विस्फोट संभव नहीं थे। पुलिस समझ नहीं पा रही है कि आखिर षड्यंत्रकारी कहां गए।

झूठा ई-मेल भेजने वाला गिरफ्तार
गुजरात पुलिस ने हैदराबाद ब्लास्ट मामले में झूठे ई-मेल पुलिस और मीडिया को भेजने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। 23 वर्षीय यह युवक इंजीनियरिंग का छात्र है। इसने अपनी पूर्व मित्र और उसके परिजनों के नाम से यह मेल भेजे। जिसमें इन लोगों को विस्फोटों की जिम्मेदारी लेते दिखाया गया। युवक गुजरात के खेड़ा का रहने वाला है।

खेड़ा के एसपी मकरंद चौहान ने बताया कि युवक का नाम शिवम व्यास है। इसने आपसे झगड़े से नाराज होकर यह ई-मेल भेजे। मेल में इसने लड़की, उसके पिता, भाई और अपने कुछ दोस्तों के नाम लिखे। इसने 2010 पुणे के जर्मन बेकरी बम विस्फोट मामले से भी इन लोगों को जोड़ने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।

चौहान ने बताया कि लड़की, उसके परिजनों और दोस्तों के हवाले से युवक ने लिखा कि ये लोग हैदराबाद के दोहरे बम विस्फोटों के साथ पुणे की जर्मन बेकरी विस्फोटों की भी जिम्मेदारी लेते हैं। युवक ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है कि उसने फर्जी ई-मेल अकाउंट बना कर मेल भेजे थे। ताकि उन लोगों से हुए झगड़े का बदला ले सके। उसने कहा कि वह लड़की को सबक सिखाना चाहता था, जो पहले उसकी अच्छी दोस्त थी।

आतंक को वित्तीय मदद 300 फीसदी तक बढ़ी
देश में आतंक के लिए वित्तीय मदद की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने आतंक को वित्तीय मदद के 1400 मामलों को आगे बढ़ने से रोका। वित्त मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार आतंकी घटनाओं के लिए वित्तीय सहायता के संदिग्ध लेन-देन में बीते वर्षों में 300 फीसदी तक इजाफा हुआ है। मंत्रालय के तहत काम करने वाली फाइनेंशियल इंटेलिजेंट यूनिट (एफआईयू) ने बताया कि 2011-12 में ऐसे 1444 मामले पकड़ गए। जबकि 2010-11 में इन मामलों की संख्या मात्र 428 थी।
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