आप आए दिन समाचार चैनलों और अखबारों में पढ़ते होंगे की जमीन के नाम पर फलानी कंपनी ने निवेशकों से करोड़ों ठग लिए और चंपत हो गयी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये इस प्रकार की ठगी के काम नया नहीं हैं।
इस प्रकार के स्कैम की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी अक्टूबर 1822 में स्कॉटलैंड में जब ग्रेगर मैकग्रेगर नामक व्यक्ति ने लोगों को रिझाने के लिए अपने आप को पोयास का प्रिंस घोषित करते हुए ये घोषणा की कि उसके पास होंडूरस नदी के तट पर वेल्स से थोड़ी बड़ी एक ऐसी जगह है जहां की भूमि इतनी उपजाऊ है कि साल में तीन बार वहां फसल पैदा होती है। पानी इतना स्वच्छ है कि वह किसी भी प्यास बुझा सकता है। जमीन में सोने की खान है और पेड़ फलों से लदे रहते हैं। उसने अपने प्रस्ताव में बरसात के अंधेरे और स्कॉटलैंड के चट्टानी मिट्टी के साथ काफी विपरीत पेशकश की।
उसकी इस घोषणा से लोगों के मन में एक नए जीवन की ललक पैदा हो गयी। उसने कहा कि पोयास के पास जो कमी है वह है अच्छे निवेशकों की जो वहां पैसा लगाकर मौजूद संसाधनों का पूरी तरह लाभ ले सकें। उस वक्त सेंट्रल और साउथ अमेरिका में निवेश लोगों को आकर्षित कर रहा था उसकी इस घोषणा से निवेशकों को स्कॉटलैंड के तौर पर एक नया निवेश का स्थान मिल गया था।
अखबार के जरिए मैकग्रेगर ने लोगों को बहकाया
मैकग्रेगर एक अच्छा सेल्समैन था और लोगों को बेवकूफ बनाने में महारत रखता था। स्कैम करने वालों को लोगों के अंदर की भावनाओं जिसमें कुछ पाने की ललक और गलत करने से अपने आप को रोकने के भाव पर नियंत्रण करना आता है।
इसी पर कार्य करते हुए मैकग्रेगर ने अखबारों में इंटरव्यू छपवाए और उसमें उसने लोगों को लालच देने के लिए पोयास के बारे में भ्रमित बातें कीं, जिसमें उसने बताया कि अगर कोई वहां निवेश करता है तो उसे कितना फायदा होगा।
उसने अखबार में लिखा कि पोयास एक ऐसी जगह है जहां आपके पास अपनी क्षमता आजमाने के साथ चुनौती और ईनाम जीतने के अपार मौके हैं। उसने अपने प्रोस्पेक्टस में आज-कल की चिटफंड कंपनियों की तरह वादों की झड़ी लगा दी थी। उसकी यह योजना कामयाब हुई और 1822 में दो लाख पाउंड उसने बांड के जरिए जमा कर लिए। यह आज के हिसाब से 3.6 बिलियन पाउंड थे।
ब्रिटेन के बाद फ्रांस के लोगों को भी ठगा
उसने सात जहाजों में वहां रहने के इच्छुक निवेशकों को भेजना तय किया। उसने दो जहाजों सितंबर 1822 में द होंडूरास पैकेट और जनवरी 1823 में केनर्सले कैसेल को 250 यात्रियों के साथ पोयास भेजा। मैकग्रेगर की सोच को टक्कर देने वाला कोई नहीं था, लेकिन जब यात्री वहां पहुंचे तो देखा मैकग्रेगर के वादे खोखले थे। वहां न कोई विकास हुआ था और न ही कुछ खाने को था। जल्द ही वहां पहुंचे यात्री मरने लगे और जो बचे उनकी जान वहां से गुजर रहे एक जहाज के लोगों ने बचायी।
इस घटना की जानकारी पाते ही ब्रिटिश नेवी ने बाकी के पांच जहाजों को वहां पहुंचने से पहले की वापस बुला लिया। मैकग्रेगर वहां से फ्रांस भाग गया। ब्रिटेन में लोगों को ठगने के बाद फ्रांस पहुंचे मैकग्रेगर ने फिर अपना जाल बिछा पोयास का जादू वहां के भोले-भाले निवेशकों पर चलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते फिर निवेशक पोयास जाने के लिए तैयार हो गए। लेकिन फ्रांस में पासपोर्ट के नियम सख्त होने के चलते अनजान शहर के लिए आए इतने आवेदनों ने सरकार के कान खड़े कर दिए और इन आवेदनों को देखते हुए जांच बैठा दी गयी।
जांच के बाद मैकग्रेगर को जेल भेज दिया गया। कुछ समय के लिए एडिबर्ग लौटने पर उसे फिर भागने का मौका मिल गया। लेकिन पोयास के नाम पर ठगे गए बांड धारकों के गुस्से का शिकार हो गया और कारकास में 1845 में उसकी मौत हो गयी।