चकबंदी महानिदेशक पद से रातोंरात हटाए गए वरिष्ठ आईएएस डॉ. अशोक खेमका ने दावा किया है कि हरियाणा में अरबों रुपये मूल्य की पंचायती जमीन पर नेताओं और अफसरों के गठजोड़ का कब्जा है और इस साठगांठ की सीबीआई या न्यायिक जांच कराने की सिफारिश करना ही उनके तबादले की वजह बना। रॉबर्ट वाड्रा की संपत्ति की जांच करने और डीएलएफ की जमीन का इंतकाल रद करने का आदेश देने वाले खेमका ने शुक्रवार को अमर उजाला से बिशेष बातचीत में हरियाणा सरकार पर कई आरोप लगाए।
'बिचौलिए बाहर होंगे तो फ्लैट सस्ते मिलेंगे'
फिलहाल हरियाणा बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक खेमका ने खुलासा किया कि रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए जमीन सौदों में बिचौलियों के जेब में 74 करोड़ रुपये जाएंगे। आईएएस के मुताबिक, यह पैसा ‘आम आदमी’ या सरकार के पास जाना चाहिए।’ खेमका ने आगे कहा, ‘सीएलयू या लाइसेंस जारी होने के बाद प्लाट या फ्लैट आम आदमी को महंगे मिलते हैं। अगर बिचौलिए बाहर होंगे तो आम आदमी को प्लाट या फ्लैट सस्ते मिलेंगे।’
तबादले के कई कारण
सवालों के जवाब में खेमका ने कहा, ‘मेरे तबादले के कई कारण हैं। पंचायतों की जमीनें रियल एस्टेट का कारोबार करने वाली कंपनियों को ट्रांसफर कर दी गई हैं। पंचायतों की हजारों एकड़ जमीन का गलत तरीके से इंतकाल करके उसे बेचा गया है। फरीदाबाद जिले में खसरा गिरदावरी में बदलाव करके पंचायती जमीन को तबदील कर दिया गया है। बाड-गुजर, रोजका-गुजर, कोट, चिरसी, अंखिर, मलिकपुर बांगड़, कलेसर और शिकोहपुर गांवों के मामले इसके उदाहरण हैं।’
सीएस को लिखे पत्र में सब बताया
21 साल की सेवा में 43 ट्रांसफर झेलने वाले इस वरिष्ठ आईएएस का कहना था कि उन्होंने हरट्रान में रहते हुए वहां हो रहे घोटाले का भी खुलासा किया था। अब 8 अक्टूबर को वाड्रा की संपत्ति की जांच शुरू की थी। उन्होंने कहा, ‘ये सभी कारण मेरे तबादले की वजह बने। मुख्यसचिव को लिखे पत्र में मैंने इन सभी कारणों का उल्लेख किया है।’