सरकारी और गैर सरकारी योजनाओं के लिए आकस्मिक जरूरत बताकर किसानों से उनकी उपजाऊ जमीन को औने-पौने दामों पर जबरन अधिग्रहण करना अब संभव नहीं हो सकेगा।
सरकार की लगभग दो वर्ष की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार बुधवार को भूमि के उचित मुआवजे का अधिकार दिलाने वाला भूमि अधिग्रहण कानून देशभर में लागू हो गया है।
इसके लागू हो जाने के साथ ही अंग्रेजी हुकूमत के समय से लागू 114 वर्ष पुराना भूमि अधिग्रहण कानून समाप्त हो गया है।
नए भूमि अधिग्रहण कानून में किसानों से जबरन भूमि अधिग्रहण पर रोक तो लगेगी ही। साथ ही यदि किसान भूमि बेचने को तैयार होते हैं तो उन्हें बाजार भाव की दर से चार गुना ऊंची कीमत मिल सकेगी।
साथ ही नए कानून में किसानों और उन पर आश्रितों के पुनर्वास व पुनर्स्थापन की भी व्यवस्था की गई है। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने उम्मीद जताई कि इस कानून से किसान, गरीब, जनजातीय वर्ग को अपनी जमीन का हक मिलेगा तो नक्सलवाद का असर अपने आप कम हो जाएगा।
नया कानून लागू हो जाने से जमीन अधिग्रहण के लिए कलेक्टर की मनमर्जी नहीं चलेगी। इतना ही नहीं सार्वजनिक हित के लिए अधिग्रहीत जमीन का उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए भी नहीं किया जा सकेगा।
इस कानून में पुनर्व्यवस्थापन व पुनर्वास का विशेष प्रावधान है। नए कानून में सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि यह पांच वर्ष पुराने मामलों पर भी प्रभावी होगा। लेकिन इसका लाभ उन्हीं किसानों को मिल सकेगा जिन्होंने अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा नहीं लिया है।