निठारी का नर पिशाच सुरेंद्र कोली मौत से पहले भगवान की शरण में है। जेल में उसने पूजा-पाठ शुरू कर दिया है। जिंदगी खत्म होने से पहले कोली अपना पूरा समय भागवत गीता पढ़ने में बिता रहा है।
खुद को निर्दोष बताते हुए वह जेल कर्मियों से कह रहा है कि मौत से पहले पश्चाताप करना चाहता हूं। इसलिए गीता के सहारे खुद को भगवान से जोड़ रहा हूं।
कोली को बृहस्पतिवार रात डासना से मेरठ जिला जेल में शिफ्ट किया गया था। डेथ वारंट जारी होते ही उसकी फांसी मुकर्रर हो गई है। लेकिन अभी इसकी कोई निश्चित तारीख नहीं है।
जीवन के अंतिम क्षणों में पहुंच चुका कोली शुक्रवार सुबह पांच बजे ही उठ गया। नित्य कर्म के बाद उसने अपनी बैरक में पूजा-पाठ किया। इसके बाद एक सामान्य बंदी की तरह खाने में उड़द-चने की दाल और लौकी की सब्जी के साथ रोटी खाई। शाम को मसूर की दाल और तोरई की सब्जी खाई।
किसी से मिलना नहीं चाहता कोली
कोली ने जेल कर्मियों से कह दिया है कि, न मैं किसी से मिलना चाहता हूं और न कोई मुझसे मिलने की कोशिश करे। मुझे पता है कि मुझे कभी भी फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा। इसलिए ज्यादा से ज्यादा समय गीता पढ़कर खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रहा हूं।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी ने बताया कि हमने किसी से भी सुरेंद्र कोली की मुलाकात पर रोक लगा रखी है। खुद कोली भी यही चाहता है। यह उसकी सुरक्षा के लिए ठीक भी है। कोली सामान्य बंदी की तरह व्यवहार कर रहा है। खुद से बातें करता है। वह डासना जेल से अपने साथ धार्मिक पुस्तक लाया है।
ज्यादातर समय उसका पढ़ने में बीत रहा है। उसके चेहरे पर कोई उतावलापन नहीं दिखता, लेकिन उदासी जरूर है। वह भी जानता है कि चंद दिनों का मेहमान है। काउंट-डाउन शुरू कर दिया गया है। जल्द ही उसे फांसी दे दी जाएगी।
रस्से पर दिनभर चली रस्साकशी
नर पिशाच सुरेंद्र कोली को किस रस्से पर लटकाया जाएगा, इसे लेकर दिन भर रस्साकशी चली। जल्लाद पवन शुक्रवार को कबाड़ी बाजार में मनीला रस्सा खोजता रहा।
हालांकि, वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने रस्सा लाने के लिए एक सिपाही को इलाहाबाद की नैनी जेल रवाना कर दिया है। उनका कहना है कि हम सभी इंतजाम पूरे करते हुए चल रहे हैं। शनिवार रात तक इसका फैसला हो जाएगा कि किस रस्से से फांसी दी जाएगी।
बताया गया कि तत्कालीन जेल अधीक्षक आरके केसरवानी के कार्यकाल में पवन जल्लाद ने रस्सा तैयार किया था। लेकिन उस समय उसकी जरूरत नहीं पड़ी थी। अब रस्से को खोजा गया तो उसका पता नहीं चला।
जल्लाद ने भी जब फांसी घर का निरीक्षण किया तो रस्सा और कुंडा नहीं मिला था। कोली को मनीला रस्से से फांसी दी जानी है।
जल्लाद पवन के अनुसार कोली को फांसी देने वाले रस्से को तैयार कर उस पर मोम का मुलम्मा चढ़ाया जाएगा। रस्सा करीब 15 मीटर का होगा। इसे तैयार कर एक घड़े में रखा जाएगा। ऐसा इसलिए, ताकि रस्सा लचकदार रहे और फांसी देने के दौरान किसी तरह की रुकावट न आए।