राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अभी मोदी सरकार से टकराव के मूड में नहीं है। नागपुर में चल रही प्रतिनिधि सभा की बैठक के जरिये संघ के शीर्ष नेतृत्व ने पूरे भगवा परिवार को ‘हम सब एक हैं’ का संदेश दिया है।
बताया जा रहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल से सबक लेते हुए संघ ने तय किया है कि वह अपनी ओर से ऐसी कोई स्थिति पैदा नहीं करेगा, जिससे उलझन की स्थिति पैदा हो। सरकार के साथ विवाद के मुद्दों को संघ ने बैठ कर समाधान समाधान निकालने पर जोर दिया है।
मोदी सरकार के दस माह के कामकाज को सही दिशा में बताते हुए सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि सरकार सही दिशा में चल रही है। हालांकि संघ नेतृत्व ने सहयोगी संगठनों पर लगाम नहीं लगाई है।
विवादित मुद्दों के लिए आपसी सहमति पर जोर
आनुषांगिक संगठन अपने क्षेत्र के मुद्दों पर राय रखते रहेंगे। इस बीच संगठन चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करते हुए सर कार्यवाह के पद पर दोबारा से भैय्या जोशी को ही चुना गया है।
मोदी सरकार के कामकाज के बारे में संघ ने अपनी संतुष्टि जताई है। मोदी के आने से देश में जहां राष्ट्रवाद की भावना प्रबल हुई है। तो योग को अंतराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने से भारत की पुरातन संस्कृति का मान बढ़ा है। मोदी को संघ अपनी विचारधारा का बड़ा प्रतीक मानता है।
संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जनता से जुड़े एक-दो मुद्दों को छोड़ मोदी सरकार के साथ कोई वैचारिक मतभेद नहीं है। संघ का मानना है कि प्रधानमंत्री पद पर मोदी के दस माह के कार्यकाल में देश ने विश्व में नई ऊंचाइयों को छुआ है।
अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से लिया सबक
हालांकि अर्थिक मुद्दों को लेकर सरकार की छवि कुछ गड़बड़ाई है, मगर संघ अधिकारियों को लगता है कि कोयला ब्लॉक और टूजी की नीलामी से सरकार के खजाने में भारी रकम आने से आने वाले महीनों में देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी।
सनद रहे कि अटल सरकार के दौरान कई मौकों पर टकराव की नौबत आई थी। तत्कालीन संघ प्रमुख के सी. सुदर्शन, सह सरकार्यवाह दत्तोपंत ठेंगड़ी, विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल और स्वदेशी जागरण मंच के नेताओं ने अटल सरकार के खिलाफ खुली लड़ाई छेड़ दी थी।
जिसके कारण भगवा परिवार के सामान्य कार्यकर्ता से लेकर आम जनता में सरकार की नीतियों को लेकर भ्रम फैल गया था। लेकिन मोदी शासन में संघ अपनी ओर से ऐसी कोई स्थिति पैदा करने के पक्ष में नहीं है।
गलती नहीं दोहराएंगे
अटल सरकार के दौरान कई मौकों पर टकराव की नौबत आई थी। संघ के नई पुराने नेताओं और स्वदेशी जागरण मंच के नेताओं ने अटल सरकार के खिलाफ खुली लड़ाई छेड़ दी थी। इस वजह से भगवा परिवार के सामान्य कार्यकर्ता से लेकर आम जनता में सरकार की नीतियों को लेकर भ्रम फैल गया था।