मिड-डे-मील योजना की शुरुआत 1995 में हुई थी। उस समय अधिकतर राज्यों ने इस योजना के नाम पर मासिक आधार पर कच्चा अनाज देना शुरू किया था।
28 नवंबर 2002 को कोर्ट ने आदेश दिया कि बच्चों को योजना के तहत पका हुआ भोजन दिया जाय।
बिहार: मिड-डे मील खाने से 22 बच्चों की मौत, 60 गंभीर
मिड-डे मिल : बीमार हुए बच्चे
22 जनवरी, 2011 : नासिक (महाराष्ट्र) स्थित नगर निगम के एक स्कूल में जहरीला भोजन खाने से 61 बच्चे बीमार पड़े
25 नवंबर, 2009 : दिल्ली में त्रिलोकपुरी स्थित शारदा जैन राजकीय सर्वोदय बालिका विद्यालय में मिड-डे मील खाने से 120 छात्राएं बीमार।
24 अगस्त, 2009 : सिवनी (मध्य प्रदेश) में एक सरकारी स्कूल में मिड-डे-मील के तहत पोहा खाने से पांच छात्र बीमार, पोहे में मरी हुई छिपकली मिली।
12 सितंबर, 2008 : नरेंगा (झारखंड) मिडल स्कूल में मिड-डे मील खाने से 60 छात्र बीमार।
मुआवजा देना पड़ा स्कूलों को
3 मई, 2010 को दिल्ली हाईकोर्ट ने मिड-डे-मील खाकर बीमार हुई 126 छात्राओं को तीन से 15 हजार रुपये तक का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
घटना पर केंद्र गंभीर
बिहार में मिड-डे-मील खाने से बच्चों की मौत की घटना के बाद केंद्र से मानव संसाधन विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अमरजीत सिंह को सारन रवाना किया गया। सिंह ही देश में मिड-डे-मील कार्यक्रम को देख रहे हैं। वह मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे।