उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरहद पर बसे ग्राम सौरा में हैजा का
जबरदस्त प्रकोप है। हैजा की चपेट में आने से एक बालक की मौत हो गई, जबकि सौ
से ज्यादा ग्रामीण पीड़ित हो गए हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी ने स्वास्थ्य
विभाग की टीम भेजी है, जो गांव में डेरा जमाकर उपचार कर रही है।
25 लोगों को मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया गया है। ग्राम प्रधान
विंद्रावन का कहना है कि हैजा की खबर गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य
केंद्र पनवाड़ी और खंड विकास अधिकारी पनवाड़ी को दी गई थी, लेकिन किसी ने
कोई सुध नहीं ली। शुक्रवार को बालक की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में
आया।
कुएं के पानी के सेवन पर लगाई रोक
मुख्य चिकित्साधिकारी डीके माहुर ने कहा कि गांव में हैंडपंप खराब होने के
कारण ग्रामीण कूड़ा करकटयुक्त कुएं का पानी पी रहे हैं। कुएं की कई दिनों
से सफाई नहीं हुई है। साथ ही बारिश में कुएं का पानी और खराब हो गया। कुएं
के पानी के सेवन पर रोक लगा दी गई है। साथ ही खंड विकास अधिकारी पनवाड़ी को
खराब पड़े हैंडपंपों को जल्द से जल्द ठीक कराए जाने के लिए लिखा गया है।
अब स्थिति सामान्य है। बालक की मौत फूड प्वाइजनिंग से हुई है।
क्या है हैजा
हैजा रोग 'विबियो कोलेरी बैक्टीरिया' से फैलता है। इसका असर आंतों में होता
है, उलटी-दस्त आते रहते हैं। समय पर उपचार न किया जाए तो मौत संभव है।
गंदे पानी का सेवन, दूषित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से यह रोग होता है।
इस बैक्टीरिया के कई प्रकार होते हैं, इसमें रोग के लक्षण के आधार पर
संक्रमण के प्रकार का पता लगाया जाता है। इस रोग के प्रभाव में आने के बाद
दो-तीन दिन में रोग के लक्षण नजर आते हैं। इलाज से जब रोगी ठीक हो जाता है,
तब भी काफी समय तक ये बैक्टीरिया संबंधित के शरीर में बने रहते हैं।
कैसे फैलता है हैजा
हैजा के बैक्टीरिया मनुष्य के मल में पाए जाते हैं, जब मक्खियां उस मल पर
बैठती हैं, तो उनके पैरों की गद्दियों में ये बैक्टीरिया चिपक जाते हैं। जब
ये मक्खियां खाने की वस्तुओं पर बैठती हैं, तो ये बैक्टीरिया वहां छूट
जाते हैं। इन वस्तुओं को जब स्वस्थ व्यक्ति खाता है, तो ये उसकी आंत में
पहुंच जाते हैं और आंतों में संक्रमण पैदा कर रोग बढ़ाते हैं।
इस रोग में उल्टी-दस्त, जबर्दस्त दस्त होने के कारण शरीर के पानी के साथ
ही द्रव व लवण भी निकल जाते हैं, तुरंत इनकी पूर्ति शरीर में फिर से करना
जरूरी होता है। यदि दो दिन तक ऐसी ही स्थिति रहे व इलाज में कोताही की जाए
तो रोगी मर जाता है। यह बीमारी शीघ्र महामारी का रूप धारण कर लेती है,
इसलिए सार्वजनिक स्थानों पर सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खुले स्थानों
पर रखी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
हैजा के लक्षण
1. जबरदस्त उल्टियां व दस्त होते हैं। कई बार उल्टी नहीं भी होती है और जी मिचलाता है व उल्टी होने जैसा प्रतीत होता है।
2. उल्टी में पानी बहुत अधिक होता है, यह उल्टी सफेद रंग की होती है। कुछ भी खाया नहीं कि उल्टी में निकल जाता है।
3. उल्टी के साथ ही पतले दस्त लग जाते हैं और ये होते ही रहते हैं, शरीर
का सारा पानी इन दस्तों में निकल जाता है। इस बीमारी में बुखार नहीं आता,
बस रोगी निढाल, थका-थका सा कमजोर व शक्तिहीन हो जाता है।
4. इस रोग में प्यास ज्यादा लगती है, पल्स मंद पड़ जाती है, यूरिन कम आता है व बेहोशी होने लगती है।
उपचार का तरीका
1. हैजे के बैक्टीरिया को खत्म करने की दवा नहीं बनी। एंटीबायोटिक दवाएं रोग की अवधि कम करती हैं, इसे फैलने से रोकती है।
2. रोग की संभावना होते ही डॉक्टर से इलाज लें। डॉक्टर सलाइन चढ़ाकर, एंटीबायोटिक दवाएं देकर रोग को बढ़ने से रोक सकता है।
3. नमक-शकर-पानी का घोल पिलाया जाता है या बना बनाया इलेक्ट्रोलाइट पिलाकर रोगी को लवणों की पूर्ति की जाती है।
4. रोगी की हालत गंभीर हो तो रक्त शिरा में इंजेक्शन देकर तुरंत आराम पहुंचाने की कोशिश की जाती है।
हैजे से बचाव
1. खुले फल, खाद्य पदार्थ व अन्य वस्तुओं का सेवन न करें।
2. दूषित पानी पीने से बचें, खुली जगह मल त्याग न करें व दूसरों को भी करने
से रोकने का प्रयास करें। हैजे के मरीज से दूर रहें। मक्खियों से बचाव
करें।
3. हैजे का वैक्सीन उपलब्ध है, जो कि छह माह तक प्रभावशील रहता है। यदि
आपको ऐसे स्थान पर रहना मजबूरी हो, जहां हैजे से संबंधित वातावरण हो तो हर
छह माह बाद इसका वैक्सीन लगवा लिया करें।