हरियाणा कैडर के आईएएस ऑफिसर अशोक खेमका की भ्रष्टाचार से पुरानी लड़ाई है। 20 सालों के करियर में वह हरियाणा में झज्जर व कैथल में उपायुक्त का पद संभालने के साथ ही हरियाणा एडमिनीस्ट्रेटिव कमीशन, सप्लाई एंड डिस्पोजल डिपार्टमेंट, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट समेत लगभग सभी विभागों में काम कर चुके हैं।
अशोक खेमका के मित्र व वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार भरद्वाज के मुताबिक राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में खेमका भ्रष्टाचार में लिप्त 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचरियों को सस्पेंड करवा चुके हैं। उनके प्रयासों से कई भ्रष्ट अधिकारी गिरफ्तार भी हो चुके हैं। भष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के कारण सीताराम जिंदल फाउंडेशन उन्हें ईमानदार अफसर के पुरस्कार से भी नवाज चुका है।
रीयल इस्टेट कंपनी डीएलएफ और रॉबर्ट वाड्रा के बीच हुए भूमि सौदे की जांच का आदेश्ा देकर वह एक बार फिर चर्चा में हैं। हरियाणा सरकार ने उन्हें ट्रांसफर का नोटिस थमा दिया है। सोमवार शाम को उन्होंने हरियाणा बीज विकास निगम में पदभार भी ग्रहण कर लिया। 20 सालों के करियर में खेमका का यह 41वां तबादला है। हालांकि इस बार उनका तबादला हंगामाखेज है। आज इसकी धमक दिल्ली में भी सुनी गई। उनके तबादले के कारण विपक्षी दलों के चौतरफा वार से कांग्रेस घिर गई है।
इंडिया अगेंस्ट करप्शन के नेता अरविंद केजरीवाल ने अशोक खेमका के तबादले के लिए हरियाणा सरकार की कड़ी आलोचना की है। टीम अन्ना की पूर्व सदस्य किरण बेदी ने भी हरियाणा सरकार के कदम की आलोचना करते हुए कहा कि ईमानदार अधिकारियों के साथ यही होता है। भारतीय जनता पार्टी, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी, इंडियन नेशनल लोक दल और हरियाणा जनतांत्रिक कांग्रेस ने भी हरियाणा सरकार के इस निर्णय की निंदा की है।
अशोक खेमका भूमि चकबंदी और भूमि दस्तावेज पंजीकरण कार्यालय में महानिरीक्षक थे। उनका तबादला 11 अक्टूबर को किया गया। लेकिन इस बार मामला सीधे गांधी परिवार से जुड़ा होने के कारण यह चर्चा में आ गया। विपक्षी के हमलों का सामना कर रही कांग्रेस के लिए संकट और ज्यादा गहरा गया है। कांग्रेस आलाकमान की ओर से सफाई दी गई कि इस मामले से उसका कोई लेना देना नहीं है। हरियाणा सरकार ने भी खेमका के आरोपों की जांच के आदेश दे दिए हैं।