उच्चतम न्यायालय ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए पाकिस्तानी वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती की बाकी सजा माफ करते हुए उन्हें अपने देश जाने की आज अनुमति दे दी।
न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अपीलकर्ता की आयु और योग्यता को देखते हुए उन्हें स्वदेश जाने की अनुमति दी जाती है।
खंडपीठ की ओर से न्यायमूर्ति सदाशिवम ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अपीलकर्ता ने एक वर्ष चार महीने जेल में काटे हैं और यह पर्याप्त है।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद चिश्ती अब स्वदेश लौटने के लिए आजाद हैं और अब उन पर किसी तरह के प्रतिबंध नहीं हैं।
न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह उसके गत 10 मई को सुनाए गए आदेश के मद्देनजर अपीलकर्ता द्वारा जमा कराए गए पांच लाख रुपए ब्याज सहित उन्हें लौटा दे।
न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि वह मोहम्मद चिश्ती की वतन वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए। मोहम्मद चिश्ती ने राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा 2010 में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। मोहम्मद चिश्ती गत नौ अप्रैल से जमानत पर थे।
उच्चतम न्यायालय ने उन्हें कुछ समय के लिए पाकिस्तान जाने की अनुमति भी दी थी। न्यायालय की शर्तों के अनुसार मोहम्मद चिश्ती पाकिस्तान से भारत लौट आए थे।