दिल्ली विधानसभा चुनावों में जीत का परचम लहराने के बाद लोकसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी आम आदमी पार्टी ने देश की सियासत में बहुत कम वक्त में काफी अंतर लाने की कोशिश की और कुछ हद तक कामयाब भी साबित हुई।
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राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि जन लोकपाल बिल पर इस्तीफा देने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी अच्छी तरह जानते थे कि अगर वे दिल्ली की सरकार में उलझे रहे, तो लोकसभा चुनावों में पूरी तैयारी के साथ नहीं उतर पाएंगे।
यही वजह है कि एग्जिट रूट तलाशा गया और शहीद के रूप में सरकार सत्ता से बाहर हो गई। अगले ही दिन से पार्टी की लोकसभा चुनावों से जुड़ी तैयारियों में रफ्तार लौट आई और कुछ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया गया। लेकिन इस सारे घटनाक्रम के बीच दिल्ली के राजनीतिक समीकरण भी बदले और अचानक पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की किस्मत खुल गई।
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केजरीवाल नहीं, सिसोदिया होंगे दिल्ली के CM!
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक यह साफ दिख रहा है कि अरविंद केजरीवाल आगामी लोकसभा चुनावों पर फोकस करने वाले हैं, ऐसे में आम आदमी पार्टी आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपनी कमान मनीष सिसोदिया को सौंप सकती है।
दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री सिसोदिया लंबे वक्त से अरविंद केजरीवाल के साथ हैं और उनके काफी करीबी बताए जाते हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार में उनके पास शहरी विकास, रेवेन्यू, शिक्षा और पीडब्ल्यूडी जैसे अहम मंत्रालय रहे थे।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर केजरीवाल लोकसभा चुनावों में किस्मत आजमाते हैं, तो इस बात की काफी संभावनाएं हैं कि सिसोदिया विधानसभा चुनावों में AAP के मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे।
लोकसभा चुनाव लड़ेंगे केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के एक सूत्र ने बताया, "मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद यह साफ हो गया है कि अब अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनावों पर फोकस करेंगे। अगर वह लोकसभा चुनाव लड़ते हैं, तो मुख्यमंत्री पद के दावेदार सिसोदिया होंगे।"
उन्होंने कहा, "उनकी साख गजब की है और शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने काम भी खूब किए हैं। वोटर के साथ सिसोदिया का एक कनेक्शन भी है।" सूत्रों का कहना है कि पार्टी लोकसभा चुनावों से पहले देश भर में फैलना चाहती हैं, ऐसे में इस बात को लेकर खास कोशिश की जाएगी कि पार्टी ने शासन के दौरान जो दिल्ली में लाभ कमाया है, वो बरकरार रहे।"
शनिवार को पार्टी के कौशांबी कार्यालय में आम आदमी पार्टी के विधायकों की एक 'अनौपचारिक' बैठक हुई, जिसमें सभी विधायकों से कहा गया कि उन्हें अपना जनसंपर्क जारी रखना चाहिए।
मनीष सिसोदिया ने कहा, "सरकार से इस्तीफा देने के बाद हमने आगे की राह के बारे में बातचीत की। यह अनौपचारिक मीटिंग थी, लेकिन विधायकों को अपने-अपने क्षेत्र में जाना जारी रखने को कहा गया है। अपने कार्यकाल में उन्होंने जो रिश्ता बनाया, वो काफी अहम है।"
सूत्रों का कहना है कि विधायकों को जनता के लिए काम करने का अपना सिस्टम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मसलन, कुछ विधानसभा क्षेत्रों में वॉलेंटियर को बीमा, रेंट एग्रीमेंट जैसी समस्याएं सुलझाने के लिए कहा गया है।"
उन्होंने कहा, "सरकार गिरने के बावजूद ये सिस्टम स्थानीय लोगों की मदद करेंगे। लोगों को पता चलेगा कि पार्टी तब भी काम करती है, जब वह सत्ता में नहीं होती।"