लोकसभा चुनाव के मैदान में अपने आगाज को धमाकेदार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल अब युवाओं को लुभाने के लिए सियासी गेमचेंजर दांव खेलने जा रहे हैं।
युवाओं को आप की ओर खींचने की इस बड़ी तैयारी के तहत लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्र सीमा 25 से घटाकर 21 करने का वादा करने जा रहे हैं।
केजरीवाल अपने इस वादे की गंभीरता को दर्शाने के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन को आप के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करेंगे।
मोदी-राहुल को मात देने की तैयारी
दरअसल भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के युवा चेहरे राहुल गांधी की युवा मतदाताओं को रिझाने के अहम फोकस के बीच आप पीछे न रह जाए, इसलिए चुनाव लड़ने की उम्र घटाने यह दांव चला जाएगा।
केजरीवाल को युवाओं का आइकन बनाने के लिए पार्टी इस वादे को तुरुप का पत्ता मान रही है। आप का मानना है कि इस ऐलान के बाद केजरीवाल युवाओं के बीच मोदी और राहुल दोनों से आगे निकलेंगे।
इसके पीछे उनका तर्क है कि संचार और सूचना क्रांति के इस युग में युवा 21 साल की उम्र तक राजनीति में अपनी भागीदारी बढ़ाने और बदलाव का नजरिया पेश करने के लिए परिपक्व हो गया है।
केजरीवाल के इस दांव के पीछे बड़ी वजह
चुनाव लड़ने की उम्र घटाने को घोषणापत्र में अहम बनाने की एक बड़ी वजह पार्टी का कैडर भी माना जा रहा है। इंडिया अंगेस्ट करप्शन के समय से केजरीवाल के साथ तीन साल पहले जब युवा बड़ी तादाद में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनसे जुड़े थे तो उसमें से काफी 18-19 साल के नौजवान थे जो अब 21 या उससे अधिक के हो चुके हैं।
25 साल की न्यूनतम उम्र सीमा होने की वजह से आप कैडर के कई नौजवान दिल्ली विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ पाए। लोकसभा चुनाव में भी उनके सामने यही संकट आया है। जबकि अकेले दिल्ली में आप के पूरे कैडर का करीब 30 फीसदी 21 साल तक का युवा है। जाहिर तौर पर यह फैसला पार्टी के युवा कैडर में भविष्य को लेकर उत्साह पैदा करेगा।
आप नेताओं का कहना है कि चुनाव लड़ने की उम्र सीमा घटाने के वायदे से युवा कार्यकर्त्ताओं में भी चुनाव लड़ने की उम्मीद बंधेगी। अपने इस वादे को लोकसभा चुनाव में भुनाने के लिए पार्टी कई तरह के तर्क और नारों के साथ पेश होने की तैयारी कर रही है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि जनता के सामने आम आदमी पार्टी के प्रचार पत्रों में बाकायदा कहा जाएगा कि राजीव गांधी के समय मतदान करने की उम्र 21 से घटा 18 साल करने के बाद अभी तक ऐसा कोई ऐतिहासिक फैसला युवाओं के लिए नहीं लिया गया है।