केजरीवाल ने राखी बिड़लान को टिकट देने के मामले में कहा है कि अगर मैंने वादा तोड़ा है तो क्या गलत किया है। फरीदाबाद में रोड शो के दौरान उनको काले झंडे भी दिखाए गए।
आपको बता दें कि केजरीवाल दो दिनों के हरियाणा दौरे पर हैं। आज वे हरियाणा दौरे के पहले दिन पार्टी का प्रचार करने के लिए फरीदाबाद में रोड शो कर रहे थे।
अरविंद ने तोड़ा वादा
अरविंद केजरीवाल से जब पूछा गया कि आपने विधायकों को लोकसभा चुनाव में नहीं उतारने का वादा किया था, और राखी बिडलान को टिकट देकर आपने वो वादा तोड़ दिया।
इस सवाल पर केजरीवाल ने कहा कि,"वादा तोड़ दिया तो क्या गलत किया? कौन सा गुनाह कर दिया?"
राखी को टिकट दिए जाने पर पार्टी के भीतर से भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं और कार्यकर्ताओं के एक धड़ा भी खफा है।
पहले भी फंस चुके हैं यू-टर्न पर
इससे पहले भी केजरीवाल यू-टर्न लेकर फंस चुके हें। विरोधी राजनीतिक दल उन पर इसी बात को लेकर लगातार हमले करते रहे हैं। इसकी शुरुआत रामलीला मैदान से हुई, जब केजरीवाल कहा करते थे कि वह चुनावी राजनीति में नहीं आएंगे।
लेकिन अन्ना आंदोलन के बाद उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया और साफ कर दिया कि वह चुनावों के बाद कांग्रेस या भाजपा से गठबंधन नहीं करेंगे। लेकिन 28 सीटों पर जीतने के बाद उन्हें सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के समर्थन की जरूरत थी और समर्थन लिया गया।
विधायक को लोकसभा टिकट क्यों?
इसके बाद सरकार गाड़ी लेने, सरकारी मकान लेने और ऐसे कई मामलों पर पलटी को लेकर केजरीवाल घिरे और आलोचना का शिकार हुए। ताजा मामला दिल्ली में आम आदमी पार्टी के टिकट पर विधायक बने नेताओं को लोकसभा का टिकट देने से जुड़ा है।
केजरीवाल ने कहा था कि विधायकों को लोकसभा चुनाव लड़ने का टिकट नहीं दिया जाएगा। बाद में खबर आई कि AAP के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ने और जीतने वाली राखी बिडलान को लोकसभा का टिकट दिया जा रहा है। इस पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ही बवाल मचा दिया। विनोद कुमार बिन्नी बगावत कर गए।
पहले महेंद्र सिंह को दिया था टिकट
इसके बाद मामला दबाने के लिए राखी की जगह महेंद्र सिंह को टिकट दिया गया, लेकिन उन्होंने राखी पर गंभीर इल्जाम लगाते हुए टिकट लौटा दिया और कहा कि वह पार्टी के साथ बने रहेंगे।
महेंद्र के टिकट लौटाने के तुरंत बाद यह टिकट राखी को दे दिया गया। जब केजरीवाल से इस बारे में सवाल किया गया, तो उनका कहना है कि अगर वो अपनी बात से मुकर गए, तो क्या हुआ? जाहिर है, यह सियासत है।