कांग्रेस से एक के बाद एक बड़े नेताओं के भाजपा और अन्य पार्टियों में जाने को देखते हुए पार्टी के अंदर अब चिंता और ज्यादा बढ़ गई है। पार्टी के कई चुनाव मैनेजर मान रहे हैं कि कांग्रेस छोड़कर जाने वाले नेता जमीनी हकीकत को भांपने के बाद ही भाजपा में शामिल हो रहे हैं।
कई मैनेजर तो यह भी मान रहे है कि जमीन पर कांग्रेस के खिलाफ अनुमान से ज्यादा ही नकारात्मक माहौल है। कुछ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना डूबते जहाज से पहले खुद को बचाने की कोशिश जैसा है।
सतपाल महाराज का कांग्रेस छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कई दिग्गज छोड़ चुके हैं कांग्रेस
महाराज के पार्टी छोड़ने से उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार पर भी खतरे की आशंका जताई जा रही है। जगदंबिका पाल, पुरुंदेश्वरी देवी, बूटा सिंह, भागीरथी प्रसाद, कर्नल सोनाराम समेत कई नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं।
करीब 50 सालों से कांग्रेसी नेता रहे बूटा सिंह ने न केवल कांग्रेस छोड़ी बल्कि भाजपा से टिकट का भरोसा नहीं मिला तो समाजवादी पार्टी के टिकट पर राजस्थान के जालौर से चुनाव लड़ने का फैसला कर डाला।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि एक के बाद एक नेताओं के पार्टी छोड़ने से नकारात्मक संदेश जा रहा है। उनका तर्क था कि पार्टी छोड़ने वाले इन नेताओं को कांग्रेस में टिकट मिलना तय था। मगर जमीनी परिस्थितियों को भांपते हुए इन्होंने कांग्रेस के टिकट के मुकाबले भाजपा के बैनर तले चुनाव लड़ना ज्यादा फायदेमंद समझा।
100 का आंकड़ा पार कर पाएगी कांग्रेस?
नेताओं के पार्टी छोड़ने पर अधिकारिक तौर पर पार्टी यही कह रही है कि चुनाव से पहले राजनीति में ऐसा होता रहता है।
कांग्रेस प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल सवाल उठा रहे है कि अगर भाजपा और मोदी की इतनी ही हवा चल रही है तो आखिर क्यों हमारे नेताओं को तोड़कर उन्हें टिकट देना पड़ रहा है। कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच महाराज का पार्टी छोड़ना चर्चा का मसला बना हुआ था।
कई कार्यकर्ता तो यह भी कह रहे थे कि अगर यही हालत रही तो पार्टी के 100 सीटों के आंकड़े को भी पार करना मुश्किल है।