एक तरफ उद्योगपति केडी सिंह अपने एनजीओ के जरिए रेप पीड़ितों की हेल्पलाइन चलवा रहे हैं, वहीं उनकी कंपनियों की अधिकतम हिस्सेदारी में चलने वाली तहलका पत्रिका विवादों में घिरी हुई है।
तहलका के संपादक तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे हैं और प्रबंधन पर उन्हें बचाने के आरोप भी लग रहे हैं।
इस मामले में तहलका के असल मालिकों की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं। तहलका की प्रकाशक अनंत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड में मेजर शेयर होल्डिंग उजागर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद केडी सिंह एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।
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के डी सिंह पर भी लगे आरोप
गैर-कानूनी तरीके से निवेशकों से पूंजी जुटाने के आरोपों से घिरने के बाद केडी सिंह ने अपनी छवि चमकाने के लिए समाज सेवा के कई काम शुरू कर दिए हैं। केडी सिंह फाउंडेशन ने रेप पीड़ितों की मदद के लिए एक सपोर्ट सेल और हेल्पलाइन शुरू की है।
फाउंडेशन का दावा है कि साल भर में 113 रेप पीड़ितों के पुनर्वास करने में मदद दी गई है। फाउंडेशन की वेबसाइट पर रेप पीड़ितों के लिए किए जा रहे कामों को जोर-शोर से पेश किया गया है।
गत मंगलवार को ही केडी सिंह फाउंडेशन ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में रेप पीड़ितों की एक आर्ट वर्कशॉप आयोजित की, जिसकी जानकारी केडी सिंह के फेसबुक पेज पर दी गई है।
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तहलका से खींच रहे हाथ
तहलका से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केडी सिंह ने अपनी छवि चमकाने के लिए अपनी कंपनियों का निवेश तहलका में कराया। वर्ष 2010 से 2012 के बीच केडी सिंह से जुड़ी कंपनी रॉयल बिल्डिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की हिस्सेदारी 30 से बढ़कर 65 फीसदी तक पहुंच गई।
हालिया विवाद के बाद कहा जा रहा है कि केडी सिंह तहलका से निवेश खींचने की सोच रहे हैं।
जिस थिंक-फेस्ट के दौरान तेजपाल ने कथित तौर पर सहकर्मी महिला पत्रकार का दो बार यौन उत्पीड़न किया, वही तेजपाल की कमाई का प्रमुख जरिया है।
थिंक-फेस्ट के लिए तेजपाल ने नीना शर्मा और शोमा चौधरी के साथ मिलकर एक अलग कंपनी बनाई है। पिछले साल केडी सिंह थिंक-फेस्ट के मुख्य वक्ताओं में शामिल थे।