प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जानबूझकर किसी प्रकाशन को विज्ञापन देने पर रोक लगाएगी, तो वह इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। काटजू ने कहा कि इस तरह व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा देखा गया है कि जो प्रकाशन अपने लेख में सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं, उन्हें मिलने वाले सरकारी विज्ञापन रोक दिए जाते हैं। यह पूरी तरह से गैर लोकतांत्रिक है और यह हमारी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। एक लोकतांत्रिक देश में इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
एक बयान में पीसीआई चीफ ने कहा कि अखबारों और पत्रिकाओं के विज्ञापन बंद करने से संबंधित प्रशासन द्वारा पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए। काटजू ने कहा कि उनके पास ऐसी कई शिकायतें आई हैं, जिसमें केंद्र या राज्य सरकार ने बिना कोई कारण बताए अखबार या पत्रिका के विज्ञापन बंद कर दिए।
कभी-कभी ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इन पत्र-पत्रिकाओं में जो सामग्री छप रही है, वह सरकार या किसी मंत्री/अधिकारी के खिलाफ होती है। काटजू ने कहा कि विज्ञापन पत्र-पत्रिकाओं की आय के मुख्य स्रोत हैं और यह मीडिया की स्वतंत्रता पर चोट है। प्रेस के पास सरकार की आलोचना करने का अधिकार है और भारतीय संविधान में भी इसका उल्लेख किया गया है।