मुंबई में आतंकी हमले में शामिल पाक दहशतगर्द अजमल कसाब ने राष्ट्रपति को जो दया याचिका भेजी थी वह चार लाइन की थी। याचिका उर्दू में लिखी गई थी। कसाब की इस दया याचिका को राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया था और उसे 21 नवंबर, 2012 को फांसी दे दी गई थी।
कसाब को फांसी दिए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद हाथ से लिखे इस याचिका को सार्वजनिक किया गया है। उर्दू भाषा में लिखी गई इस याचिका में कई गलतियां हैं। इस दया याचिका की प्रति लखनऊ निवासी उर्वशी शर्मा को सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत उपलब्ध कराई गई है।
अपनी इस छोटी से याचिका में कसाब ने लिखा था, ‘सर, मुझे फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट हो गई है। फांसी की सजा से मुझे छोड़ दिया जाए। मेरे ऊपर दया करो और मुझे फांसी से रिहा कर दे। आपका अजमल कसाब।’ जेल अधिकारियों ने गलतियों को सुधारते हुए इसका अनुवाद किया था। राष्ट्रपति ने इस याचिका को 5 नवंबर, 2012 को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद कसाब को 21 नवंबर 2012 को पुणे के यरवदा जेल में फांसी दे दी गई थी।