फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करुणानिधि से मिले मंत्री, नाराजगी बरकरार

Mon, 18 Mar 2013 11:02 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंकाई तमिलों के मामले में अमेरिका समर्थित प्रस्ताव पर केंद्र के रुख से नाराज द्रमुक को मनाने की यूपीए सरकार की कोशिशें फिलहाल नाकाम रही हैं।
विज्ञापन


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से चेन्नई गए तीन आला कैबिनेट मंत्रियों ए. के. एंटनी, पी. चिदंबरम और गुलाम नबी आजाद ने करुणानिधि से मुलाकात की और उन्हें यूपीए सरकार से नहीं हटने के लिए मनाने का प्रयास किया। मगर द्रमुक प्रमुख फिलहाल अपने पुराने रुख पर कायम हैं।

मुलाकात के बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि करुणानिधि ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की ओर से श्रीलंका के खिलाफ लाए जाने वाले प्रस्ताव को लेकर कुछ संशोधन सुझाए हैं। जिसकी जानकारी वह प्रधानमंत्री को देंगे।
विज्ञापन


हालांकि माना जा रहा है कि द्रमुक प्रमुख ने तीनों मंत्रियों से कह दिया कि वह अभी भी केंद्र सरकार से अपने मंत्रियों के इस्तीफे की बात पर अडिग हैं। मगर साथ ही यह भी कहा है कि यूपीए सरकार को गिरने से बचाने के लिए वह उसे बाहर से अपना समर्थन जारी रखेंगे।

द्रमुक के इस सियासी दबाव का ही नतीजा माना जा रहा कि भारत ने श्रीलंका के साथ प्रस्तावित रक्षा सचिव स्तरीय वार्ता फिलहाल स्थगित कर दी है।

द्रमुक की सरकार से समर्थन वापसी की धमकी से यूपीए की बेचैनी बढ़ गई है। लिहाजा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने तीन कैबिनेट मंत्रियों को आनन फानन में चेन्नई में द्रमुक प्रमुख को मनाने के लिए भेजना पड़ा।

कांग्रेस के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि यह मामला सुलझ जाएगा मगर द्रमुक प्रमुख के तेवरों को देखकर सरकार और कांग्रेस के अंदर चिंता का माहौल है।

तीनों मंत्रियों की करुणानिधि से मुलाकात से पहले दोपहर में संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने बताया कि हमारे तीन वरिष्ठ मंत्री करुणानिधि से मिलने जा रहे हैं। इस मामले में डीएमके की कुछ आपत्तियां हैं और कुछ सुझाव भी हैं।

केंद्रीय मंत्री करुणानिधि से बात करके उनके सुझावों पर गौर कर उनकी आपत्तियों का निदान करेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया कि श्रीलंका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर भारत के रुख पर फैसला करुणानिधि से चर्चा के बाद ही किया जाएगा।

गौरतलब है कि डीएमके प्रमुख करुणानिधि ने धमकी दी है कि यदि श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में अमेरिका प्रायोजित प्रस्ताव में भारत संशोधन लाने में विफल रहा तो उनकी पार्टी सत्ताधारी यूपीए से अलग हो जाएगी।

श्रीलंका के खिलाफ अमेरिकी प्रस्ताव के 21 मार्च को जिनेवा में होने वाली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में पेश होने की उम्मीद है, जिस पर मत विभाजन होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें