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भारतीय उच्चायुक्त की मेजबानी से कराची के क्लब का इनकार

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पाकिस्तानी शहर कराची में एक क्लब ने भारतीय उच्चायुक्त टीसीए राघवन और उनकी पत्नी की मेजबानी करने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान-इंडिया सिटिजन्स फ्रेंडशिप फोरम ने 26 अक्टूबर को उस क्लब में एक कार्यक्रम आयोजित किया था और भारतीय उच्चयुक्त उसमें आमंत्रित थे।
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अपनी शान-ओ-शौकत के लिए मशहूर सिंध क्लब ने बिना कारण बताए टीसीए राघवन की मेजबानी से इनकार कर दिया, जबकि वह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कराची पहुंच चुके थे।

मोहम्मद अली जिन्ना के परपोते लियाकत मर्चेंट पाकिस्तान-इंडिया सिटिजन्स फ्रेंडशिप फोरम के को-चेयरमैन हैं। उन्हें उस कार्यक्रम में भाषण भी देना था। माना जा रहा है कि सिंध क्लब के फैसले से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में और तल्खी आ सकती है।
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‌शिवसेना के विरोध के कारण रद्द हुआ गुलाम अली का शो

प‌िछले दिनों में शिवसेना के विरोध के कारण मुंबई में पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था। शिवसेना महाराष्ट्र सरकार में साझीदार है और लगातार पाकिस्तान का विरोध कर रही है।

पाकिस्तान में पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महूमद कसूरी की किताब का विमोचन समारोह आयोजित करने के विरोध में शिवसेना कार्यकर्ता भाजपा के पितृपुरुष लाल कृष्‍ण आडवाणी के सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी के मुंह पर कालिख भी पोत चुकी है।

पाकिस्तान और भारत की संभावित क्रिकेट सीरीज पर चर्चा के लिए भारत आए पाकिस्तानी क्रिकेट प्रमुख शहरयार खान और बीसीसीआई प्रमुख शशांक मनोहर के बीच होने वाली बातचीत भी शिवसेना के विरोध के कारण रद्द करनी पड़ी थी।
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सिंध क्लब के फैसले पर विदेश मंत्रालय गंभीर

कराची का सिंध क्लब 1871 में बना था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, 26 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम के लिए भारत के उच्चायुक्त समेत कई नामचीन ह‌स्तियों को कार्ड भेजा गया था।

सिंध क्लब के फैसले को भारतीय विदेश मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। व‌िदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सिंध क्लब का ये फैसला मुंबई में पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली का कार्यक्रम रद्द किए जाने की प्रतिक्रिया भी हो सकता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, भारत में पाक उच्चायुक्त अब्‍दुल बासित के साथ भी ऐसे वाकये हो चुके हैं। इसी साल उन्हें चंडीगढ़ में होने वाला एक कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था, क्यों पंजाब और हरियाणा सरकारों ने उनकी मेजबानी करने से मना कर दिया था।
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