कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने यौन उत्पीड़न के मामले में कथित दोषी जस्टिस एके गांगुली के खिलाफ महज सेवानिवृत्त होने के आधार पर आगे कार्रवाई नहीं करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शुक्रवार को सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को दबाया नहीं जा सकता।
कानून मंत्री ने कहा कि मुझे थोड़ी निराशा हुई है, क्योंकि संस्थान ने पाया है कि यौन संबंध बनाने के उकसावे की बात को सही पाया गया है और उसे मामले को आगे बढ़ाना चाहिए था।
सिब्बल ने कहा कि उनके विचार में प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह से इस मामले को यह कहकर दबा दिया है कि शीर्षस्थ अदालत का मामले से कोई लेना-देना नहीं है। क्योंकि वह अब न्यायाधीश नहीं हैं। इस तरह से यौन उत्पीड़न के मुद्दे को दबाया नहीं जा सकता।
पढ़े: चौतरफा घिरे जस्टिस गांगुली पर शिकंजा कसना तय
सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की समिति ने जस्टिस गांगुली को एक विधि इंटर्न के खिलाफ अवांछित व्यवहार और यौन प्रकृति के आचरण का प्रथम दृष्टया दोषी पाया है।
करीब एक साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके जस्टिस गांगुली इस समय पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के प्रमुख हैं। उन पर एक इंटर्न ने पिछले वर्ष दिसंबर में दिल्ली के एक होटल के कमरे में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। हालांकि जस्टिस गांगुली ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
पढ़े: जस्टिस गांगुली दोषी, पर नहीं कर सकते हैं कार्रवाईः
याद रहे कि विधि इंटर्न ने एक ब्लॉग में यौन उत्पीड़न की घटना का उल्लेख किया था। मीडिया में आने के बाद चीफ जस्टिस पी.सदाशिवम् ने तीन न्यायाधीशों की समिति को आरोपों की सत्यता का पता लगाने का जिम्मा सौंपा था। उसी समिति ने इंटर्न के आरोपों की पुष्टि की है।