यौन उत्पीड़न के आरोप का सामना कर रहे तरुण तेजपाल से संबंधों को लेकर कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने यह तो स्वीकार किया है कि उन्होंने ही तहलका पत्रिका शुरू करने के लिए तेजपाल को आर्थिक मदद की थी।
उन्होंने यह भी माना कि तेजपाल को उन्होंने चंदे के तौर पर पांच लाख रुपये दिए थे और वह तहलका के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।
मगर तहलका में किसी तरह की हिस्सेदारी और साझेदारी के आरोप को उन्होंने सिरे से खारिज किया।
सिब्बल ने कहा कि अगर तेजपाल दोषी हैं तो उन्हें सजा होनी चाहिए। तेजपाल को बचाने और पुराने संबंधों के सवालों पर सिब्बल बृहस्पतिवार को भड़क गए।
उन्होंने उल्टे पत्रकारों से पूछा कि तरुण सिब्बल नाम का एक शख्स मेरा संबंधी है तो क्या इस देश के सभी तरुण मेरे रिश्तेदार हैं। इस बात से भी उन्होंने इंकार किया कि तेजपाल की कंपनी में वह शेयरधारक हैं।
उन्होंने माना कि एनडीए सरकार के समय जब तहलका भाजपा के निशाने पर थी। तब तेजपाल उनसे मदद मांगने आए थे और उन्होंने पांच लाख रुपये का चेक दिया था। सिब्बल ने कहा कि तेजपाल कई लोगों के पास गए थे।
वह मेरे पास भी आए। मैं उन्हें नहीं जानता था। वह चंदा था। वे रुपये शेयर के लिए नहीं दिए गए थे। उन्होंने मुझसे अखबार शुरू करने के लिए मदद मांगी। तो मैंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के आधार पर उन्हें मदद दी।
उन्होंने कहा कि वह मानते है कि वह तहलका के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। लेकिन उन्होंने कभी भी इसके शेयर के लिए आवेदन नहीं किया और न ही उनके पास कोई शेयर हैं।
सिब्बल ने कहा कि यदि किसी ने उनके नाम शेयर दिखाए हैं तो वह क्या कर सकते हैं। मालूम हो कि भाजपा कांग्रेस पर तेजपाल को बचाने का आरोप लगा रही है।
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने सिब्बल की ओर इशारा करते हुए कहा था कि एक केंद्रीय मंत्री तेजपाल को बचाने का काम कर रहा है।