केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल इंजीनियरिंग में सिंगल प्रवेश परीक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ बैठक कर एक बार फिर इसमें शामिल होने के लिए मनाएंगे। आईआईटी, एनआईटी तथा अधिकांश डीम्ड विश्वविद्यालयों के इस परीक्षा में शामिल होने की रजामंदी के बावजूद ज्यादातर राज्य अभी भी सिंगल प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए सहमत नहीं हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि जून महीने में कैब कमेटी की बैठक के बाद कपिल सिब्बल ने दावा किया था कि सिंगल प्रवेश परीक्षा पर केंद्रीय वित्त पोषित संस्थाओं के साथ ही ज्यादातर राज्य भी सहमत हैं लेकिन विभिन्न कारणों से पहले आईआईटी ने इस परीक्षा का विरोध किया। यद्यपि कई बदलाव के बाद आईआईटी ने इस परीक्षा में शामिल होना स्वीकार कर लिया है।
एनआईटी भी शामिल होने के लिए सहमत है। पिछले हफ्ते दिल्ली में हुई एक बैठक के बाद मंत्रालय का दावा है कि 65 डीम्ड विवि में से साठ ने इसमें वर्ष 2013 से ही शामिल होने पर सहमति दे दी है। गोवा, हरियाणा, गुजरात तथा हिमाचल प्रदेश भी परीक्षा का हिस्सा बनने के लिए सहमत है।
तथ्य यह है कि इन सारी संस्थाओं के सिंगल प्रवेश परीक्षा का हिस्सा बनने के बावजूद देश में उपलब्ध इंजीनियरिंग की कुल सीटों का 90 फीसदी हिस्सा इससे बाहर होगा। वर्तमान में देश में इंजीनियरिंग की कुल 15 लाख से भी अधिक सीटें हैं। इनमें से ज्यादातर सीटें राज्य के विश्वविद्यालयों में अथवा इनसे संबद्ध कालेजों से जुड़ी हैं। देश में इंजीनियरिंग की 65 फीसदी सीटें दक्षिणी राज्यों से हैं जहां से अभी तक एक भी राज्य सिंगल प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है।
मानव संसाधन मंत्री सिब्बल को यह अच्छी तरह मालूम है कि जब तक राज्य की संस्थाएं सिंगल प्रवेश परीक्षा का हिस्सा नहीं बनती, वे अपने मकसद में कामयाब नहीं होंगे। इसीलिए वे एक बार फिर अक्तूबर के अंतिम हफ्ते में राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ इस मुद्दे पर बैठक कर उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे। इस बैठक के ठीक बाद केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (कैब) की भी बैठक बुलाई गई है।